अमेरिका की अपनी नीतियां बनीं मुसीबत, महंगाई से डॉलर दबदबे तक 4 बड़े संकटों में घिरी इकोनॉमी

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल अमेरिका इस समय कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। टैरिफ नीतियों, बढ़ती महंगाई, महंगे कर्ज, कच्चे तेल की तेजी और डॉलर के दबदबे पर उठते सवालों ने अमेरिकी इकोनॉमी के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

Advertisement

In Short

  • टैरिफ नीतियों और आयातित सामान की बढ़ती कीमतों से वहां महंगाई फिर चिंता का कारण बन रही है।
  • कच्चे तेल की तेजी और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने अमेरिकी बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है।
  • भारत, चीन, रूस और BRICS देशों के स्थानीय मुद्रा व्यापार से डॉलर की वैश्विक पकड़ कमजोर होने की चिंता बढ़ी है।

By Gaurav Kumar:

अमेरिका लंबे समय से अपनी आर्थिक ताकत के दम पर दुनिया के कई देशों पर अपनी नीतियों का असर डालता रहा है। प्रतिबंध, डॉलर का दबदबा और आक्रामक टैरिफ नीतियों के जरिए अमेरिका ने कई देशों पर दबाव बनाया। लेकिन अब यही नीतियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी बनती नजर आ रही हैं।

फिलहाल अमेरिका की इकोनॉमी चार बड़े मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। इनमें बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व की दुविधा और डॉलर पर निर्भरता कम होने का खतरा शामिल है।

टैरिफ का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ा

अमेरिका ने ट्रेड वॉर रोकने और वैश्विक आर्थिक संकट से बचाने के नाम पर भारत, चीन और यूरोपीय देशों से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाए थे।

ये खबर पढ़ना ना भूलें: GDP ग्रोथ के बीच PM मोदी की बड़ी अपील, सोना खरीदने और विदेशों में शादी को लेकर कही ये बात

हालांकि इसका असर अब अमेरिकी कंपनियों और ग्राहकों पर भी दिख रहा है। पुराने स्टॉक खत्म होने के बाद आयातित सामान महंगे हो रहे हैं, जिससे महंगाई फिर बढ़ने लगी है।

अमेरिका की सालाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर करीब 3.4 फीसदी बनी हुई है, जबकि यूएस फेडरल रिजर्व का लक्ष्य 2 फीसदी है।

कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के लारक द्वीप पर हमले और उसके जवाब में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तनाव और बढ़ गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

तेल महंगा होने से महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की चिंता बढ़ी है। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा है। 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.79 फीसदी हो गई है, जो जनवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।

फेडरल रिजर्व के सामने बड़ी चुनौती

महंगाई और तेल कीमतों के बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भी दुविधा में है। फेड चेयर केविन वार्श के सख्त रुख ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

अगर महंगाई 2 फीसदी के लक्ष्य पर नहीं आती है, तो ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या और सख्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।

ऊंची ब्याज दरों का असर अमेरिकी लोगों पर पड़ रहा है। होम लोन, कार लोन और कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो गया है।

डॉलर के दबदबे पर भी बढ़ा खतरा

अमेरिका की प्रतिबंध और टैरिफ नीतियों के बीच भारत, चीन, रूस और BRICS देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

इससे वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होने की चर्चा बढ़ी है। डॉलर का कमजोर होता दबदबा अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

महंगाई रोकें या ग्रोथ बचाएं, अमेरिका के सामने सवाल

अमेरिका अब ऐसी स्थिति में है जहां उसे महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को मंदी से बचाने के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।

वैश्विक बाजारों में जारी हलचल के पीछे मध्य-पूर्व तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण बनी हुई हैं।

Read more!
Advertisement