टाटा ग्रुप के 157 साल, जमशेदजी टाटा से चंद्रशेखरन तक, इन 7 दिग्गजों ने बदली कंपनी की पहचान
157 साल पुराना टाटा ग्रुप आज दुनिया के सबसे भरोसेमंद कारोबारी समूहों में शामिल है। इसके पीछे कई दिग्गजों की सोच और नेतृत्व रहा है। जमशेदजी टाटा से शुरू हुआ यह सफर जेआरडी टाटा, रतन टाटा और एन चंद्रशेखरन तक पहुंचा। अब नए नेतृत्व को लेकर सबकी नजरें टिकी हैं।

In Short
- 157 साल के सफर में जमशेदजी टाटा से लेकर एन चंद्रशेखरन तक 7 दिग्गजों ने संभाली टाटा ग्रुप की कमान।
- जेआरडी टाटा और रतन टाटा के दौर में ग्रुप ने भारत से निकलकर ग्लोबल बिजनेस में बनाई मजबूत पहचान।
- एन चंद्रशेखरन के 2027 में पद छोड़ने के ऐलान के बाद टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चा तेज।
Tata Group history: टाटा ग्रुप आज नमक से लेकर स्टील, कार, कॉफी और सॉफ्टवेयर तक कई क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुका है। इस बड़े कारोबारी साम्राज्य की शुरुआत साल 1868 में जमशेदजी टाटा ने की थी। इसके बाद कई दिग्गजों ने ग्रुप की कमान संभाली और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अब एन चंद्रशेखरन के 2027 में कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ने के ऐलान से एक बार फिर टाटा ग्रुप के अगले लीडर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
जमशेदजी टाटा ने रखी थी नींव (1868-1904; 36 years)
जमशेदजी टाटा ने 1868 में सिर्फ 21 हजार रुपये की पूंजी से ट्रेडिंग कंपनी शुरू की थी। उन्होंने आगे चलकर टेक्सटाइल, स्टील, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कदम रखा।
उनका सपना चार बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने का था, जिसमें स्टील कंपनी, एक बेहतरीन शिक्षण संस्थान, एक खास होटल और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट शामिल थे। उनके जीवनकाल में सिर्फ ताज महल होटल का सपना पूरा हो पाया, जिसकी शुरुआत मुंबई के कोलाबा में दिसंबर 1903 में हुई थी। हालांकि उनके कई बड़े सपने उनकी मौत के बाद पूरे हुए, जिनमें टाटा स्टील और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस शामिल हैं।
सर दोराबजी टाटा ने बढ़ाया कारोबार( 1904-1932; 28 years)
1904 से 1932 तक ग्रुप की कमान संभालने वाले सर दोराबजी टाटा ने अपने पिता के सपनों को आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में 1907 में टाटा स्टील और 1911 में टाटा पावर की शुरुआत हुई।
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उन्होंने 1909 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की नींव रखने में भी अहम भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप तीन कॉटन मिलों और ताज होटल से आगे बढ़कर देश की बड़ी प्राइवेट स्टील कंपनी, तीन इलेक्ट्रिक कंपनियों और एक प्रमुख इंश्योरेंस कंपनी तक पहुंच गया।
नवरोजी सकलतवाला का छोटा लेकिन अहम कार्यकाल (1932-1938; 6 years)
1932 से 1938 तक नवरोजी सकलतवाला ने टाटा ग्रुप का नेतृत्व किया। वह सर दोराबजी टाटा के भरोसेमंद सहयोगी थे। उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण पर खास ध्यान दिया।
उनके समय में कर्मचारियों के लिए प्रॉफिट शेयरिंग योजना, कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने और अस्थायी कर्मचारियों की सुविधाओं में सुधार जैसे कदम उठाए गए।
जेआरडी टाटा ने बदली ग्रुप की पहचान (1938-1991; 53 years)
1938 से 1991 तक जेआरडी टाटा ने पांच दशक से ज्यादा समय तक टाटा ग्रुप की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में ग्रुप ने एविएशन, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, होटल और आईटी जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया।
जेआरडी टाटा ने टाटा मोटर्स, टीसीएस और टाइटन जैसी कंपनियों को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्हें 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
रतन टाटा के दौर में ग्लोबल बना ग्रुप (1991-2012; 21 years)
1991 में रतन टाटा ने ऐसे समय में जिम्मेदारी संभाली जब भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए खुल रही थी। उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने कई बड़े ग्लोबल अधिग्रहण किए।
टेटली, जगुआर लैंड रोवर, कोरस और ब्रूनर मोंड जैसी कंपनियों को खरीदकर ग्रुप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। उनके समय में टीसीएस एक बड़ी ग्लोबल आईटी कंपनी बनी। साल 2012 में रतन टाटा ने पद छोड़ा और उनकी जगह साइरस मिस्त्री आए।
साइरस मिस्त्री से एन चंद्रशेखरन तक
साइरस मिस्त्री ने 2012 से 2016 तक टाटा ग्रुप की कमान संभाली। उन्होंने कारोबार को बेहतर बनाने और निवेश पर रिटर्न बढ़ाने पर ध्यान दिया। हालांकि 2016 में टाटा बोर्ड ने उन्हें चेयरमैन पद से हटा दिया। इसके बाद रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली।
2017 में एन चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप की कमान संभाली। वह पहले ऐसे गैर-पारसी प्रोफेशनल चेयरमैन बने, जिन्होंने इस ग्रुप का नेतृत्व किया। उन्होंने 1987 में टीसीएस में इंटर्न के तौर पर शुरुआत की थी और 2009 में कंपनी के सीईओ बने।
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2022 में एयर इंडिया की टाटा ग्रुप में वापसी शामिल रही। इसके अलावा उन्होंने एयर इंडिया, विस्तारा और एयरएशिया इंडिया के विलय की प्रक्रिया को संभाला। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी सेल गीगाफैक्ट्री जैसे हाईटेक क्षेत्रों में भी ग्रुप की एंट्री उनके दौर में हुई।
अब एन चंद्रशेखरन के 2027 में पद छोड़ने के ऐलान के बाद टाटा ग्रुप एक बार फिर नए नेतृत्व की तलाश के दौर में पहुंच गया है।