Tata Sons को लेकर बड़ा अपडेट, RBI ने अपर-लेयर NBFC लिस्ट में रखा नाम

RBI ने 2026-27 के लिए बड़ी फाइनेंस कंपनियों की नई लिस्ट जारी की है। इसमें Tata Sons समेत 17 कंपनियां शामिल हैं। Tata Sons ने NBFC का दर्जा खत्म करने के लिए आवेदन दिया है, जिस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस लिस्ट में आने वाली कंपनियों पर RBI कड़ी नजर रखता है।

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In Short

  • RBI की अपर लेयर NBFC लिस्ट में Tata Sons समेत कुल 17 कंपनियों को शामिल किया गया है।
  • Tata Sons का डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन अभी जांच में है, लेकिन फिलहाल कंपनी लिस्ट में बनी रहेगी।
  • Bajaj Finance, Tata Capital, REC, PFC और Shriram Finance जैसी बड़ी कंपनियों के नाम भी इस लिस्ट में हैं।

By Gaurav Kumar:

RBI Upper Layer NBFC List: भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपर लेयर NBFC कंपनियों की नई लिस्ट जारी कर दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस लिस्ट में Tata Sons समेत कुल 17 बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को जगह मिली है। इस कैटेगरी में आने के बाद कंपनियों पर RBI की निगरानी और नियम पहले से ज्यादा सख्त हो जाते हैं।

Tata Sons का नाम क्यों है खास?

RBI ने Tata Sons को भी अपर लेयर NBFC की लिस्ट में रखा है। हालांकि, Tata Sons ने NBFC का रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए आवेदन दे रखा है।

केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि कंपनी का नाम लिस्ट में शामिल होने से उसके आवेदन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। Tata Sons के डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन की अभी जांच चल रही है और उस पर आखिरी फैसला आना बाकी है।

लिस्ट में और कौन-कौन सी कंपनियां?

RBI की नई लिस्ट में REC, Power Finance Corporation, Bajaj Finance, Shriram Finance और Tata Capital जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

इन कंपनियों को उनके कारोबार के आकार और देश के फाइनेंशियल सिस्टम में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए अपर लेयर में रखा गया है।

PNB Housing Finance भी लिस्ट में बनी रहेगी

PNB Housing Finance और Sammaan Capital को भी अपर लेयर NBFC की कैटेगरी में बनाए रखा गया है। हालांकि, ये दोनों कंपनियां मौजूदा समय में इस कैटेगरी की शर्तों को पूरा नहीं कर रही हैं।

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फिर भी पहले से अपर लेयर में शामिल होने की वजह से इन पर सख्त नियम और RBI की ज्यादा निगरानी जारी रहेगी।

अपर लेयर NBFC का क्या मतलब है?

RBI ने NBFC कंपनियों को उनके आकार और जोखिम के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी में बांटा है। बड़ी और फाइनेंशियल सिस्टम के लिए ज्यादा अहम कंपनियों को अपर लेयर में रखा जाता है।

इस कैटेगरी में आने वाली कंपनियों को अपने कामकाज, जोखिम और मैनेजमेंट से जुड़ी ज्यादा जानकारी देनी होती है। इसके साथ ही उन्हें मजबूत नियमों का पालन भी करना पड़ता है।

Tata Sons पर आगे भी रहेगी नजर

Tata Sons का नाम अपर लेयर लिस्ट में आने के बाद कंपनी के NBFC दर्जे और संभावित IPO को लेकर चर्चा फिर बढ़ सकती है। फिलहाल RBI ने सिर्फ इतना साफ किया है कि कंपनी का डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन अभी जांच के दायरे में है।

जब तक इस आवेदन पर आखिरी फैसला नहीं आता, Tata Sons का नाम अपर लेयर NBFC लिस्ट में बना रहेगा।

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