Rajesh Exports की बढ़ीं मुश्किलें! PLI स्कीम से बाहर हो सकती है कंपनी; MCA जांच पर भी विचार

SEBI के गंभीर आरोपों के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को ACC बैटरी PLI योजना से बाहर किया जा सकता है। वहीं, MCA भी कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग की जांच पर विचार कर रहा है।

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By Gaurav Kumar:

राजेश एक्सपोर्ट्स की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बिजनेस टुडे ने ईटी के रिपोर्ट के हवाला देते हुए बताया कि कंपनी को सरकार की एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना से बाहर किया जा सकता है। 

राजेश एक्सपोर्ट्स को 2022 में ACC बैटरी स्टोरेज के लिए 18,100 करोड़ रुपये की PLI योजना के तहत प्रोत्साहन के लिए चुना गया था। उस समय Reliance New Energy Solar, Ola Electric Mobility, Hyundai Global Motors Company और Rajesh Exports को कुल 50 GWh बैटरी क्षमता के लिए अलॉटमेंट मिला था। योजना के तहत कंपनियों को दो साल के अंदर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करनी थीं और भारत में निर्मित बैटरियों की बिक्री के आधार पर प्रोत्साहन मिलना था।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA) कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग की जांच पर विचार कर रहा है। दरअसल सेबी ने अंतरिम आदेश जारी कर राजेश एक्सपोर्ट्स और इसके फाउंडर एवं एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश मेहता को जांच पूरी होने तक सिक्योरिटी मार्केट से दूर रहने का निर्देश दिया है।

सेबी का क्या है आरोप?

SEBI ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने पांच साल के दौरान अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा गलत तरीके से दिखाया है और जरूरी मंजूरी और खुलासों के बिना कंपनी के फंड का इस्तेमाल किया। सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स के कंसो रेवेन्यू का करीब 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा उसकी विदेशी सहायक कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित Valcambi SA से आता था। हालांकि कंपनी ने इन सहायक कंपनियों के वित्तीय डिटेल सार्वजनिक रूप से लगातार उपलब्ध नहीं कराए।

SEBI का दावा है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों से जुड़े लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से पेश किया, जो कुल राजस्व का 99.80 प्रतिशत हिस्सा था।

राजेश एक्सपोर्ट्स ने क्या दिया जवाब?

इन आरोपों पर जवाब देते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा कि उसके वित्तीय डिटेल्स में दिखाया गया राजस्व सही है। कंपनी के मुताबिक, SEBI ने Valcambi के EBITDA को राजस्व मान लिया, जिससे राजस्व में करीब 97 प्रतिशत का अंतर दिखाई दिया। कंपनी ने इसे 'भ्रम और कम्युनिकेशन का मामला बताते हुए कहा कि वह सभी जरूरी दस्तावेज नियामक को सौंपकर स्थिति स्पष्ट करेगी।

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