ट्रंप के टैरिफ का असर नहीं, अमेरिका को भारत का निर्यात अब भी मजबूत, 20% हिस्सेदारी बरकरार

ट्रंप के टैरिफ और व्यापारिक दबाव के बावजूद अमेरिका भारत के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। नए देशों के साथ समझौते बढ़ाने के बाद भी अमेरिकी बाजार की अहमियत कम नहीं हुई। आंकड़े बताते हैं कि भारत का एक्सपोर्ट संबंध अब भी US के साथ मजबूत बना हुआ है।

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In Short

  • ट्रंप के भारी टैरिफ के बावजूद अमेरिका भारत के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है और हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही।
  • भारत ने जोखिम कम करने के लिए ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते बढ़ाए।
  • अमेरिका के अलावा चीन, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और अन्य देशों में भी भारत के निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

By BT बाज़ार डेस्क:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ और भारत की ओर से दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद अमेरिका अभी भी भारत के निर्यात का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल के आंकड़ों के मुताबिक भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी पर बनी हुई है।

टैरिफ बढ़ने के बाद भी अमेरिका को निर्यात पर ज्यादा असर नहीं

व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार जुलाई तक के 12 महीनों में अमेरिका भारत के निर्यात का करीब 20 फीसदी हिस्सा रहा। इस दौरान ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर एक समय 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में फरवरी में घटाकर 18 फीसदी किया गया। मौजूदा समय में भारतीय सामानों पर 10 फीसदी टैरिफ लागू है।

इसके बावजूद अमेरिका के साथ भारत का व्यापार मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अमेरिकी बाजार को किसी दूसरे बाजार से बदलना आसान नहीं है।

भारत ने नए बाजारों की तलाश तेज की

अमेरिका के साथ व्यापार में अनिश्चितता बढ़ने के बाद भारत सरकार ने दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते तेज किए। पिछले एक साल में भारत ने ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता किया, जो जुलाई से लागू हुआ। इसके अलावा यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ भी समझौते हुए हैं।

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हालांकि नए बाजारों में विस्तार की कोशिश जारी है, लेकिन इसका बड़ा असर दिखने में अभी दो से तीन साल लग सकते हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय के मुताबिक निर्यातकों के लिए अमेरिका अब भी सबसे आकर्षक बाजार बना हुआ है।

अमेरिका को निर्यात की हिस्सेदारी बढ़ी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अमेरिका को भारत के निर्यात की हिस्सेदारी 2022-23 में 17.4 फीसदी थी, जो अब बढ़कर करीब 20 फीसदी हो गई है। हालांकि टैरिफ विवाद के बाद भारतीय उद्योगों ने जोखिम कम करने के लिए नए बाजारों पर ध्यान देना शुरू किया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे सेक्टर में अमेरिका अहम

अमेरिकी बाजार भारत के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयों, रत्न और आभूषण तथा कपड़ा जैसे क्षेत्रों में बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच कई महीनों की बातचीत के बाद भी अभी तक कोई व्यापार समझौता नहीं हो पाया है।

भारत सरकार अब ज्यादा देशों के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके तहत करीब 500 नए उत्पादों को निर्यात सूची में शामिल किया गया है, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और समुद्री उत्पाद शामिल हैं।

दूसरे देशों में भी बढ़ रहा भारत का निर्यात

भारत ने ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बाजारों में भी निर्यात बढ़ाया है। जुलाई तक के 12 महीनों में तंजानिया, वियतनाम, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और केन्या जैसे देशों में भी निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई।

वहीं चीन को भारत का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार पिछले 12 महीनों में चीन को निर्यात 42 फीसदी बढ़कर 21.5 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका को निर्यात 88.5 अरब डॉलर का रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि नए व्यापार समझौते भारत को नए अवसर दे सकते हैं, लेकिन वैश्विक बाजार में बदलाव के लिए भारत के पास समय सीमित है।

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