ग्रोथ का दम दिखाकर विदेशी निवेश जुटाएगा भारत, दुनिया के सामने रखा बड़ा विजन
भारत विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए अपनी ग्रोथ स्टोरी दुनिया के सामने रख रहा है। विदेशी पूंजी में कमी के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल ग्लोबल निवेशकों से जुड़ रहे हैं। सरकार भारत की आर्थिक ताकत, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल विकास को निवेश के बड़े अवसर के तौर पर पेश कर रही है।

In Short
- भारत विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपनी ग्रोथ स्टोरी को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर पेश कर रहा है।
- विदेशी निवेश में कमी के बीच निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल निवेशकों से जुड़ने में जुटे हैं।
- सरकार ने भारत की ग्रोथ के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश डिजिटल विकास और बढ़ते मध्यम वर्ग को अहम ताकत बताया है।
भारत अपनी आर्थिक ग्रोथ की कहानी को अब वैश्विक निवेशकों तक पहुंचाने में जुटा है। सरकार का फोकस ऐसे समय में विदेशी पूंजी आकर्षित करने पर है जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। इसी बीच देश में युवाओं से जुड़े रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौ दिन के दौरे पर कनाडा और अमेरिका गई हैं, जहां व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दे अहम एजेंडे में हैं। वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल जापान में भारत को एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के तौर पर पेश कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों को भारत पर भरोसा दिलाने की कोशिश
कनाडा के टोरंटो में निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत ऐसी अर्थव्यवस्था है जिसमें दुनिया को रुचि लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों की भागीदारी भारत को ग्रोथ का इंजन बनाने में मदद कर सकती है।
सरकार का यह प्रयास ऐसे समय हो रहा है जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन यह बढ़ोतरी विदेशी निवेश में उसी स्तर की तेजी नहीं ला पाई है।
विदेशी निवेश में कमी बनी चुनौती
इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से पैसा निकाला है। ऊंचे शेयर वैल्यूएशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में दूसरे देशों में बढ़ते निवेश ने भी भारत के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की थी। वहीं अगले तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में करीब 8 फीसदी की तेज रफ्तार का अनुमान लगाया जा रहा है।
रुपये और बाजार प्रदर्शन पर दबाव
आर्थिक मजबूती के बावजूद भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की रुचि कम हुई है। मई में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भी रुपये में बड़ी मजबूती नहीं आई है।
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बैंक ऑफ अमेरिका के एक फंड मैनेजर सर्वे के मुताबिक अगस्त में भारत एशिया का सबसे कम पसंद किया जाने वाला शेयर बाजार बन गया और उसने इंडोनेशिया की जगह ले ली।
युवाओं की चुनौतियां भी बनी मुद्दा
भारत की युवा आबादी देश की ताकत होने के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने ला रही है। युवाओं के लिए बेहतर नौकरियों की कमी, आय में असमानता और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
इन प्रदर्शनों ने शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर किया है। कुछ कार्यकर्ता सरकारी स्कूलों में सुधार को लेकर अभियान चला रहे हैं।
सरकार ने गिनाए विकास के आधार
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की ग्रोथ सिर्फ मौजूदा आर्थिक चक्र पर निर्भर नहीं है बल्कि यह एक संरचनात्मक बदलाव है। उन्होंने शहरीकरण, बढ़ते मध्यम वर्ग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को देश की ताकत बताया।
सरकार ने हाल के वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश भी बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो 2014-15 के मुकाबले छह गुना से ज्यादा है।