भारत में तेजी से बढ़ रहा निजी अस्पताल का कारोबार! 2030 तक ₹40,000 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है निवेश

विदेशी निवेशक और प्राइवेट इक्विटी फर्म भी हेल्थकेयर चेन में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसके साथ कंपनियां नए अस्पताल खोलने और क्षेत्रीय अस्पतालों का अधिग्रहण कर बड़े नेटवर्क खड़े करने में जुटी हैं।

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By Siddharth Zarabi:

भारत के निजी अस्पताल सेक्टर में तेजी का दौर चल रहा है। मणिपाल, अपोलो, मैक्स हेल्थकेयर, मेदांता और फोर्टिस समेत बड़ी हॉस्पिटल चेन 2030 तक क्षमता बढ़ाने के लिए 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश कर रही हैं। विदेशी निवेशक और प्राइवेट इक्विटी फर्म भी हेल्थकेयर चेन में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसके साथ कंपनियां नए अस्पताल खोलने और क्षेत्रीय अस्पतालों का अधिग्रहण कर बड़े नेटवर्क खड़े करने में जुटी हैं।

मुनाफे ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा

इस विस्तार के पीछे अस्पताल कारोबार की बढ़ती कमाई भी बड़ी वजह है। भारत की लिस्टेड अस्पताल कंपनियां रिकॉर्ड राजस्व और मुनाफा दर्ज कर रही हैं। पिछले एक दशक में निफ्टी हॉस्पिटल इंडेक्स की कंपनियों की संयुक्त सकल बिक्री 247% बढ़ी है। FY26 में इन कंपनियों का मुनाफा 15 गुना बढ़ गया।

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इस तेजी का असर इलाज की पहुंच पर भी दिख रहा है, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में। हालांकि, इलाज की बढ़ती लागत, ऊंचे अस्पताल बिल और कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।

डॉक्टर से उद्यमी बनने की कहानी

इस विस्तार में ‘डॉक्टरप्रेन्योर’ की भूमिका अहम है। ये डॉक्टर अपनी क्लिनिकल प्रैक्टिस से आगे बढ़कर ऐसे संस्थान बना रहे हैं, जो उन्हें भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था में काम करते हुए दिखी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करते हैं।

डॉ. प्रताप सी. रेड्डी ने पर्याप्त कार्डियक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के बीच अपोलो की नींव रखी। डॉ. देवी शेट्टी ने सस्ती हार्ट केयर पर जोर दिया। कार्डियक सर्जन डॉ. नरेश त्रेहन ने मेदांता के जरिए एडवांस्ड मल्टी-स्पेशियलिटी केयर पर फोकस किया। डॉ. रमेश कंचरला ने रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के जरिए बाल चिकित्सा पर ध्यान दिया, जबकि डॉ. धर्मिंदर नागर ने महानगरों से बाहर संगठित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया। नई पीढ़ी में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष चौधरी भी डॉक्टर-नेतृत्व वाले अस्पतालों को किफायती और बड़े पैमाने पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

किफायती इलाज अब भी बड़ी चुनौती

निवेश और इंश्योरेंस कवरेज बढ़ने के बावजूद परिवारों पर इलाज का खर्च बड़ा बोझ बना हुआ है। असली चुनौती यह है कि लोगों का अपनी जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च घटे।

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भारत के मेडिकल टूरिज्म में ट्रांसलेटर और सांस्कृतिक मध्यस्थ भी अहम कड़ी बन चुके हैं। वे विदेशी मरीजों को एयरपोर्ट से अस्पताल तक पहुंचाने, कागजी कार्रवाई, रहने की व्यवस्था, भावनात्मक सहयोग और संकट की स्थिति संभालने में मदद करते हैं।

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