त्योहारों से पहले चीनी ने बढ़ाई टेंशन, भारत से ब्राजील तक बिगड़ रहा सप्लाई का गणित

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने चिंता बढ़ा दी है। भारत में उत्पादन अनुमान से कम रह सकता है, जबकि ब्राजील में इथेनॉल की बढ़ती मांग और खराब मौसम ग्लोबल सप्लाई पर दबाव डाल रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • भारत में मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो शुरुआती अनुमान से कम है।
  • ब्राजील में गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल इथेनॉल के लिए होने और एल नीनो के असर से ग्लोबल चीनी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
  • अमेरिकी बाजार में चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर हैं और 2026-27 में वैश्विक कमी का अनुमान बढ़ाया गया है।

By Gaurav Kumar:

भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतें चिंता बढ़ा रही हैं। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में आई तेजी के पीछे इथेनॉल अकेली वजह नहीं है। कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, गन्ने की फसल को नुकसान, ग्लोबल सप्लाई में कमी और जमाखोरी जैसे कई कारण इसके पीछे बताए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दुनिया को चीनी एक्सपोर्ट करने वाला भारत अब चीनी इंपोर्ट करने जा रहा है।

अनुमान से कम रह सकता है चीनी उत्पादन

मौजूदा सीजन में भारत का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है। शुरुआत में गन्ना उत्पादक राज्यों ने करीब 343 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया था। यानी शुरुआती अनुमान के मुकाबले उत्पादन कम रह सकता है।

गन्ने की फसल को रेड रॉट यानी लाल सड़न और टॉप बोरर बीमारी से नुकसान हुआ है। इसके अलावा समय से पहले ज्यादा बारिश के कारण हुए जलभराव का असर भी फसल पर पड़ा है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जो अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।

सिर्फ भारत की नहीं है परेशानी

चीनी को लेकर दबाव केवल भारत में नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक ब्राजील में भी स्थिति बदल रही है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के कुल गन्ना उत्पादन में ब्राजील की हिस्सेदारी 24 फीसदी और भारत की 16 फीसदी है।

ब्राजील में गन्ने का ज्यादा इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन के लिए होने से चीनी की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। ब्राजील की नेशनल सप्लाई कंपनी कोनाब के मुताबिक चीनी उत्पादन में करीब 3 फीसदी की कटौती हो सकती है।

मौसम भी बढ़ा रहा मुश्किल

एल नीनो का असर भी गन्ना उत्पादन वाले इलाकों पर पड़ रहा है। ब्राजील के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में बारिश में देरी और बढ़ते तापमान से उत्पादन प्रभावित हुआ है। भारत और थाईलैंड जैसे गन्ना उत्पादक क्षेत्रों पर भी मौसम का असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

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अमेरिकी कमोडिटी बाजार में चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर कारोबार कर रही हैं और मई 2025 के बाद के उच्च स्तर के करीब हैं। विश्लेषकों ने 2026-27 में ग्लोबल शुगर की कमी के अनुमान को भी बढ़ाया है।

इथेनॉल की तरफ क्यों बढ़ रहा ब्राजील?

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें ब्राजील जैसे देशों में गन्ने को चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। ब्राजील ने जुलाई के आखिर में अनिवार्य इथेनॉल मिश्रण की दर बढ़ाकर 32 फीसदी कर दी। यह एक महीने पहले 30 फीसदी और एक साल पहले 27 फीसदी थी।

अगर गन्ने का ज्यादा हिस्सा इथेनॉल की तरफ जाता है और मौसम का दबाव बना रहता है तो ग्लोबल मार्केट में चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

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