Budget 2026 में PM-KUSUM 2.0 का बड़ा ऐलान संभव, किसानों और सोलर सेक्टर को मिल सकता है ₹50,000 करोड़ का बूस्ट

बजट तैयारियों से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के लिए फंडिंग में करीब 45% की बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुल आवंटन मौजूदा ₹34,422 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹50,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

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By Gaurav Kumar:

Union Budget 2026: यूनियन बजट 2026 में सरकार PM-KUSUM के अगले चरण का ऐलान कर सकती है। बजट तैयारियों से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस योजना के लिए फंडिंग में करीब 45% की बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुल आवंटन मौजूदा ₹34,422 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹50,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

PM-KUSUM 2.0 का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के पास

सूत्रों के अनुसार Ministry of New and Renewable Energy ने PM-KUSUM 2.0 का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेज दिया है। मौजूदा स्कीम मार्च 2026 में खत्म हो रही है, ऐसे में सरकार इसके रिवैंप्ड वर्जन को अगले बजट में लॉन्च कर सकती है।

नए चरण में ग्रामीण भारत में डिसेंट्रलाइज्ड सोलर डिप्लॉयमेंट पर ज्यादा जोर, किसानों के लिए ऊंची सब्सिडी और प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है।

क्या है PM-KUSUM योजना?

2019 में शुरू हुई प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान का मकसद खेती को डीजल पर निर्भरता से मुक्त करना, सिंचाई लागत घटाना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसके तहत किसानों को स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने या ग्रिड से जुड़े पंपों को सोलराइज करने पर 30 से 50 फीसदी तक की केंद्रीय सब्सिडी मिलती है।

योजना किसानों को बंजर या खाली पड़ी जमीन पर 2 मेगावाट तक के ग्रिड-कनेक्टेड सोलर प्लांट लगाने और अतिरिक्त बिजली स्थानीय डिस्कॉम को बेचने की भी अनुमति देती है।

34,800 मेगावाट का लक्ष्य

मौजूदा PM-KUSUM फ्रेमवर्क के तहत मार्च 2026 तक करीब 34,800 मेगावाट सोलर क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कंपोनेंट A के तहत कृषि भूमि पर 10,000 मेगावाट के डिसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल पावर प्लांट,

कंपोनेंट B में 14 लाख स्टैंडअलोन सोलर पंप,

और कंपोनेंट C के तहत 35 लाख ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सोलराइजेशन शामिल है।

राज्यों को B और C के बीच क्षमता ट्रांसफर की भी छूट है।

PM-KUSUM 2.0 में क्या बदलेगा?

अधिकारियों के मुताबिक PM-KUSUM 2.0 में ग्रिड-कनेक्टेड डिसेंट्रलाइज्ड सोलर प्लांट, एग्रीकल्चरल सोलर पंप और फीडर-लेवल सोलराइजेशन पर फोकस और तेज होगा। नई तकनीकों की एंट्री, ज्यादा इंसेंटिव और बैटरी स्टोरेज को शामिल करने की तैयारी है, ताकि ग्रिड इंटीग्रेशन बेहतर हो सके।

इसके साथ ही सरकार प्राइवेट निवेश को आकर्षित करने और प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाने के लिए कंप्लायंस नियमों को भी आसान करने पर काम कर रही है।

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