Budget 2026: 80% टैक्सपेयर्स नए सिस्टम में, बजट 2026-27 में पुराने टैक्स पर बड़ा संकेत संभव
सरकार के कामकाज से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, बीते कुछ साल में बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स नए टैक्स सिस्टम की ओर शिफ्ट हुए हैं और इसके कई फायदे सामने आए हैं। उनका कहना है कि करीब 80% टैक्सपेयर्स फिलहाल नए टैक्स सिस्टम में हैं, ऐसे में बजट पुराने सिस्टम को लेकर कोई दिशा संकेत दे सकता है।

Union Budget 2026: न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को लोग तेजी से अपना रहे हैं। इस बीच यूनियन बजट 2026-27 में ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।
सरकार के कामकाज से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, बीते कुछ साल में बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स नए टैक्स सिस्टम की ओर शिफ्ट हुए हैं और इसके कई फायदे सामने आए हैं। उनका कहना है कि करीब 80% टैक्सपेयर्स फिलहाल नए टैक्स सिस्टम में हैं, ऐसे में बजट पुराने सिस्टम को लेकर कोई दिशा संकेत दे सकता है।
बिजनेस टुडे को सूत्र ने बताया कि पुराने टैक्स सिस्टम को तुरंत खत्म किए जाने की संभावना कम है। हालांकि बजट में इसके लिए एक 'सनसेट डेट' यानी खत्म होने की संभावित समय-सीमा का संकेत दिया जा सकता है, ताकि टैक्सपेयर्स धीरे-धीरे नए सिस्टम में शिफ्ट हो सकें।
वहीं, एक अन्य सूत्र का कहना है कि सरकार के पास दूसरा विकल्प यह भी है कि पुराने सिस्टम को जारी रखा जाए और जैसे-जैसे इसके यूजर्स घटते जाएं, इसका महत्व अपने आप धीरे-धीरे कम हो जाए। सूत्र के मुताबिक, जिन टैक्सपेयर्स के पास लंबी अवधि के निवेश, बचत योजनाएं या होम लोन हैं, उनके लिए पुराना टैक्स सिस्टम अब भी फायदेमंद साबित होता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, असेसमेंट ईयर 2024-25 के लिए 31 जुलाई 2024 तक दाखिल 7.28 करोड़ आईटीआर में से 5.27 करोड़, यानी करीब 72%, नए टैक्स सिस्टम के तहत फाइल किए गए। यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि यूनियन बजट 2025-26 में नए टैक्स सिस्टम के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स नहीं लगाने की घोषणा की गई थी, जो पहले 7 लाख रुपये तक सीमित थी। इसके साथ ही टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव करते हुए 30% टैक्स स्लैब को अब 24 लाख रुपये से ऊपर की सालाना आय पर लागू किया गया।
टैक्स मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि पुराना टैक्स सिस्टम लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा देता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है। एक टैक्स कंसल्टिंग फर्म के मैनेजिंग पार्टनर अमित महेश्वरी के मुताबिक, सरकार नए टैक्स सिस्टम को सरलता और कम कागजी कार्रवाई के कारण आगे बढ़ा रही है, लेकिन पुराने सिस्टम को पूरी तरह खत्म करना कई सवाल खड़े कर सकता है। उनके अनुसार, पुराने सिस्टम ने पीपीएफ, ईएलएसएस, बीमा और होम लोन जैसे साधनों के जरिए वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा दिया है।