Budget 2026: ग्रामीण विकास को मिल सकता है बड़ा बूस्ट, बजट से पहले बड़ा संकेत - Details
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार का अप्रोच लगातार एक जैसा रहा है- इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ग्रोथ को रफ्तार देना, नौकरियां पैदा करना और सोशल डिलीवरी को मजबूत करना। बजट 2026 में इन्हीं प्राथमिकताओं को और मजबूती मिलेगी।

Union Budget 2026: केंद्र सरकार यूनियन बजट 2026 में अपनी मौजूदा फिस्कल रणनीति को बरकरार रख सकती है। बिजनेस टुडे के रिपोर्टर चेतन भूटानी के ने अपनी रिपोर्ट में बजट तैयारियों से जुड़े लोगों के मुताबिक बताया कि सरकार का फोकस पहले की तरह कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने, रोजगार सृजन और टार्गेटेड सोशल सेक्टर खर्च पर रहेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार का अप्रोच लगातार एक जैसा रहा है- इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ग्रोथ को रफ्तार देना, नौकरियां पैदा करना और सोशल डिलीवरी को मजबूत करना। बजट 2026 में इन्हीं प्राथमिकताओं को और मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण विकास पर बड़ा दांव
बजट 2026 में ग्रामीण विकास पर खर्च को लेकर बड़ा दांव खेला जा सकता है। Ministry of Rural Development के लिए FY26 में 1.88 लाख करोड़ रुपये का आवंटन है, जो पिछले साल से करीब 8% ज्यादा है। सूत्रों के मुताबिक, अगले बजट में इसमें डबल डिजिट बढ़ोतरी पर विचार चल रहा है, ताकि ग्रामीण इलाकों में खपत को रफ्तार दी जा सके।
बजट चर्चाओं से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि ग्रामीण खर्च में अगले साल सार्थक बढ़ोतरी दिख सकती है। मंत्रालय के आवंटन में दो अंकों की वृद्धि पूरी तरह टेबल पर है।
मौजूदा योजनाएं और खर्च का ढांचा
फिलहाल मंत्रालय के कुल खर्च का करीब 85% तीन बड़ी योजनाओं- मनरेगा, पीएम आवास योजना-ग्रामीण और पीएम ग्राम सड़क योजना पर जाता है। इनमें मनरेगा के लिए 86,000 करोड़ रुपये, पीएमएवाई-जी के लिए 54,882 करोड़ रुपये और पीएमजीएसवाई के लिए 19,000 करोड़ रुपये का आवंटन है।
ग्रामीण रोजगार नीति में बदलाव
सरकार ग्रामीण रोजगार नीति में संरचनात्मक बदलाव की तैयारी में है। अधिकारियों के मुताबिक FY27 से मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ लाने की योजना है। इस नए फ्रेमवर्क के लिए करीब 95,000 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है।
PM Internship Scheme का बड़ा विस्तार
युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए पीएम इंटर्नशिप स्कीम के बड़े विस्तार की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, उम्र सीमा 21-24 साल से बढ़ाकर 18-30 साल करने, मौजूदा 5,000 रुपये के स्टाइपेंड को दोगुने से ज्यादा करने और इंडस्ट्री पार्टिसिपेशन को तेजी से बढ़ाने पर विचार हो रहा है।