दुनिया की दिग्गज कार कंपनी लेगी बड़ा फैसला, आधे मॉडल होंगे कम और 50 हजार नौकरियों पर खतरा
Volkswagen साल 2030 तक अपनी करीब आधी कारों को बाजार से हटा सकती है। कंपनी वेरिएंट और फीचर भी कम करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स में 50 हजार और नौकरियां घटने की बात भी सामने आई है। आखिर कंपनी इतना बड़ा बदलाव क्यों कर रही है, पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- Volkswagen साल 2030 तक अपने ग्लोबल मॉडल पोर्टफोलियो को करीब 50 फीसदी कम करेगी।
- कंपनी गाड़ियों के वेरिएंट और फीचर ऑप्शन घटाकर प्रोडक्ट कॉम्प्लेक्सिटी 75 फीसदी तक कम करना चाहती है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी Volkswagen अपने कारोबार में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने तय किया है कि वह हर सेगमेंट में कई मॉडल बेचने के बजाय उन्हीं गाड़ियों पर ज्यादा ध्यान देगी जिनकी बाजार में अच्छी मांग है और जिनसे बेहतर कमाई हो सकती है। इसके साथ ही कंपनी उत्पादन और खर्च भी कम करना चाहती है।
2030 तक आधे हो सकते हैं मॉडल
Volkswagen ने साल 2030 तक अपने ग्लोबल मॉडल पोर्टफोलियो को करीब 50 फीसदी घटाने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में कंपनी के कई मॉडल बाजार से हट सकते हैं। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि किन गाड़ियों को बंद किया जाएगा।
इस फैसले का असर Volkswagen के साथ Skoda Seat Porsche Bentley और Lamborghini जैसे ब्रांड्स पर भी पड़ सकता है। Volkswagen ग्रुप के पास 10 से ज्यादा कार ब्रांड हैं जिन्हें अलग-अलग देशों में बेचा जाता है।
कम मिलेंगे वेरिएंट और फीचर ऑप्शन
कंपनी केवल गाड़ियों के मॉडल ही कम नहीं करेगी बल्कि उनके वेरिएंट और फीचर ऑप्शन भी घटाएगी। Volkswagen का लक्ष्य प्रोडक्ट की जटिलता को करीब 75 फीसदी तक कम करना है।
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आने वाले समय में ग्राहकों को कम ट्रिम लेवल कम फीचर कॉम्बिनेशन और सीमित ऑप्शन मिल सकते हैं। इससे गाड़ियों को बनाना आसान होगा लागत कम होगी और नए मॉडल कम समय में तैयार किए जा सकेंगे।
एक जैसी तकनीक का होगा ज्यादा इस्तेमाल
Volkswagen आगे चलकर कम प्लेटफॉर्म और कम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। अलग-अलग ब्रांड्स की कारों में एक जैसी तकनीक साझा की जाएगी। इससे कंपनी को खर्च कम करने और उत्पादन की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
ग्लोबल प्रोडक्शन भी होगा कम
वाहन उत्पादन के मामले में Volkswagen दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। पिछले साल Toyota ने 11,322,000 वाहन बनाए थे जबकि Volkswagen का उत्पादन 8,983,000 यूनिट रहा था।
कोविड महामारी से पहले Volkswagen के पास हर साल करीब 1.2 करोड़ वाहन बनाने की क्षमता थी। पिछले कुछ वर्षों में यह क्षमता कम हुई है और अब यूरोप तथा चीन जैसे बड़े बाजारों में उत्पादन और घटाने की तैयारी है।
क्यों बदल रही है कंपनी की रणनीति
कंपनी के मुताबिक चीन की कार कंपनियों से बढ़ता मुकाबला नए सरकारी नियम रिसर्च और डेवलपमेंट पर बढ़ता खर्च और ग्राहकों की बदलती पसंद कारोबार पर दबाव डाल रही है। साल 2021 की तुलना में कंपनी का मुनाफा भी काफी कम हुआ है। इसी वजह से खर्च घटाना Volkswagen की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
50 हजार और नौकरियों पर मंडरा सकता है खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस बदलाव के दौरान कुछ फैक्ट्रियां बंद हो सकती हैं और कर्मचारियों की संख्या भी घटाई जा सकती है। Volkswagen ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक CEO ओलिवर ब्लूम ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में करीब 50,000 अतिरिक्त नौकरियां कम करने की बात कही है। ऐसा होने पर Volkswagen ग्रुप में कुल करीब 1 लाख कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।