45% वाहन मालिक बोले- E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब हुई तो करेंगे कानूनी कार्रवाई, सर्वे में बड़ा खुलासा
E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों की चिंता बढ़ रही है। इंडिया टुडे ने लोकलसर्किल्स के सर्वे के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया कि 45% लोग नुकसान होने पर कानूनी कदम उठाने के लिए तैयार हैं। पुरानी गाड़ियों के मालिक किन दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं, पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- इंडिया टुडे ने लोकलसर्किल्स के एक सर्वे के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया कि 45% वाहन मालिक E20 पेट्रोल से नुकसान होने पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।
- 2023 से पहले की पेट्रोल गाड़ियों के 55% मालिकों ने रिपेयर और टूट-फूट बढ़ने की शिकायत की है।
- रायपुर कंज्यूमर कमीशन ने ग्रैंड विटारा बदलने या करीब 20.5 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है।
E20 Fuel Damage: भारत में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर वाहन मालिकों की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। इंडिया टुडे ने लोकलसर्किल्स के एक सर्वे के मुताबिक अपनी रिपोर्ट में बताया कि अगर पेट्रोल वाहन मालिकों को लगे कि E20 फ्यूल के कारण उनकी गाड़ी में बड़ा नुकसान हुआ है, तो 45% लोग कंज्यूमर कोर्ट जाने या दूसरे कानूनी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।
यह सर्वे रायपुर कंज्यूमर कमीशन के उस फैसले के बाद किया गया, जिसमें मारुति सुजुकी और उसके डीलर को एक ग्राहक की ग्रैंड विटारा बदलने या करीब 20.5 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया गया था।
45% वाहन मालिक अपनाएंगे कानूनी रास्ता
सर्वे में 316 जिलों के 22,373 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया। उनसे पूछा गया कि अगर E20 पेट्रोल से उनकी गाड़ी को बड़ा नुकसान होता है, तो वे इसकी भरपाई के लिए क्या कदम उठाएंगे।
इसमें 31% लोगों ने कहा कि वे कंज्यूमर कमीशन में शिकायत करेंगे। वहीं, 14% लोगों ने कहा कि वे अपने पास मौजूद सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। इस तरह कुल 45% लोग कानूनी रास्ता अपनाने के लिए तैयार दिखाई दिए।
कंपनी से मुआवजा मांगेंगे 27% लोग
सर्वे में 18% वाहन मालिकों ने कहा कि वे गाड़ी बनाने वाली कंपनी और फ्यूल कंपनी दोनों से मुआवजा मांगेंगे। वहीं, 9% लोग केवल वाहन बनाने वाली कंपनी से भरपाई की मांग करेंगे।
ये खबर पढ़ना ना भूलें: Hyundai Kona मालिकों के लिए अलर्ट: हजारों SUVs वापस, सीट बेल्ट में आखिर क्या मिली खराबी
इस तरह 27% लोग पहले कंपनी या फ्यूल सप्लायर से सीधे नुकसान की भरपाई मांगना चाहते हैं। इसके अलावा 14% लोगों ने कहा कि वे इस मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे, जबकि 14% लोग अभी फैसला नहीं कर पाए हैं।
पुरानी गाड़ियों में बढ़ा खर्च
सर्वे के मुताबिक, 2023 से पहले खरीदी गई पेट्रोल गाड़ियों के 55% मालिकों ने बताया कि 2025 की शुरुआत के बाद उनकी गाड़ियों में टूट-फूट या रिपेयर की जरूरत असामान्य रूप से बढ़ी है।
लोकलसर्किल्स ने अपने पुराने सर्वे का भी जिक्र किया, जिसमें 66% वाहन मालिकों ने बताया था कि उनकी गाड़ी का माइलेज 10% से ज्यादा घट गया है।
रायपुर कंज्यूमर कोर्ट ने क्या कहा
रायपुर कंज्यूमर कमीशन ने 14 जुलाई को ग्रैंड विटारा से जुड़े मामले में फैसला सुनाया था। ग्राहक ने आरोप लगाया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ी के इंजन में बार-बार खराबी, कम पावर, चलते-चलते बंद होने और माइलेज घटने जैसी दिक्कतें आईं।
कमीशन ने कंपनी और डीलर को गाड़ी बदलने या कीमत, रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस समेत करीब 20.5 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया। इसके साथ मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये देने को भी कहा गया।
मारुति सुजुकी का कहना है कि बिक्री के समय ग्रैंड विटारा तय फ्यूल नियमों के मुताबिक थी। कंपनी इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती है।
कम एथेनॉल वाला पेट्रोल देने की मांग
लोकलसर्किल्स ने सरकार से एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी की दोबारा समीक्षा करने की अपील की है। संस्था ने सुझाव दिया है कि E20 के साथ E0, E5 या E10 पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि पुरानी गाड़ियों के मालिक अपनी गाड़ी के हिसाब से सही फ्यूल चुन सकें।