भारत में डीजल का ट्रेंड बदला, छोटी कारों से निकलकर अब SUV में क्यों बढ़ रही डिमांड
एक समय छोटी हैचबैक और सेडान में डीजल इंजन आम था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। आज डीजल का दबदबा ज्यादातर SUV में दिख रहा है। Tata Altroz सबसे सस्ती डीजल कार है, जबकि बाकी सस्ते विकल्प लगभग सभी SUV हैं। आखिर बाजार में यह बदलाव क्यों आया?

In Short
- भारत में डीजल कारों का बाजार अब छोटी हैचबैक और सेडान से हटकर तेजी से SUV सेगमेंट तक सिमट रहा है।
- Tata Altroz देश की सबसे सस्ती डीजल कार है, जबकि इसके बाद आने वाले ज्यादातर डीजल मॉडल SUV हैं।
- जुलाई 2026 में डीजल की हिस्सेदारी बढ़कर 17.73% हुई, लेकिन यह बढ़त पूरे बाजार की वापसी नहीं बल्कि SUV डिमांड से जुड़ी है।
Diesel cars in India: एक समय भारत में डीजल कारें बेहतर माइलेज, कम रनिंग कॉस्ट और ज्यादा टॉर्क के लिए खूब पसंद की जाती थीं। छोटी हैचबैक से लेकर सेडान और बड़ी SUV तक, लगभग हर सेगमेंट में डीजल इंजन का विकल्प मिलता था। लेकिन अब तस्वीर काफी बदल चुकी है। डीजल खत्म नहीं हुआ है, बल्कि इसका बाजार धीरे-धीरे SUV तक सिमटता जा रहा है।
सबसे सस्ती डीजल कार कौन सी है?
फिलहाल Tata Altroz भारत की सबसे सस्ती डीजल कार है, जिसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 8.24 लाख रुपये है। इसके बाद Mahindra Bolero, Bolero Neo, Tata Nexon, Hyundai Venue, Kia Sonet, Mahindra Thar, Kia Syros और Tata Curvv जैसे मॉडल आते हैं।
इस लिस्ट में खास बात यह है कि Altroz अकेली हैचबैक है। बाकी लगभग सभी मॉडल SUV या SUV आधारित वाहन हैं।
कभी छोटी कारों में भी मिलता था डीजल
कुछ साल पहले डीजल का विकल्प लगभग हर सेगमेंट में मिलता था। Maruti Suzuki ने Swift, Dzire और Celerio जैसी कारों में भी डीजल इंजन दिया था। Celerio में तो 793cc का छोटा टू-सिलेंडर डीजल इंजन मिलता था।
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Hyundai भी Grand i10, i20 समेत कई सेडान और SUV में डीजल विकल्प देती थी। अब स्थिति यह है कि भारत में कोई मास-मार्केट डीजल सेडान नहीं बची है और हैचबैक में भी विकल्प बेहद सीमित हैं।
SUV में क्यों बचा हुआ है डीजल?
SUV आमतौर पर बड़ी और भारी होती हैं और इनका इस्तेमाल लंबी दूरी के सफर में भी ज्यादा होता है। डीजल इंजन का मजबूत लो-एंड टॉर्क, हाईवे पर बेहतर एफिशिएंसी और लोड के साथ अच्छा माइलेज इन वाहनों के लिए ज्यादा काम का साबित होता है।
यही वजह है कि Thar, Scorpio, XUV और Fortuner जैसी गाड़ियों में डीजल इंजन ज्यादा मायने रखता है। बड़ी SUV खरीदने वाला ग्राहक इसके अतिरिक्त खर्च को भी स्वीकार कर सकता है।
जुलाई के आंकड़े क्या कहते हैं?
FADA के मुताबिक जुलाई 2026 में पेट्रोल और एथेनॉल वाली पैसेंजर गाड़ियों की हिस्सेदारी 41.68% रही। जून में यह 43.15% और जुलाई 2025 में 47.62% थी।
वहीं डीजल की हिस्सेदारी जून के 16.32% से बढ़कर जुलाई में 17.73% हो गई। हालांकि एक साल पहले यह 17.97% थी।
CNG की हिस्सेदारी 24.67%, हाइब्रिड की 8.02% और EV की 7.90% रही। तीनों को मिलाकर इनकी हिस्सेदारी 40.59% पहुंच गई।
E20 भी बदल रहा खरीद का फैसला
FADA के मुताबिक E20 फ्यूल को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताओं ने भी जुलाई में खरीद के फैसलों को प्रभावित किया। कुछ खरीदार CNG, हाइब्रिड और EV की ओर बढ़े।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि डीजल की बड़ी वापसी हो रही है। असल बदलाव यह है कि डीजल अब छोटी किफायती कारों की जगह बड़ी SUV और लंबी दूरी के इस्तेमाल से जुड़ा फ्यूल बनता जा रहा है।