₹20 लाख की कार या स्मार्ट कैब सफर? जानें आपके लिए कौन सा विकल्प है बेहतर
कार खरीदना कभी सुविधा और स्टेटस से जुड़ा फैसला माना जाता था, लेकिन अब बढ़ते खर्च ने लोगों को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। ईएमआई, पेट्रोल, मेंटेनेंस और पार्किंग जैसे खर्चों के बीच सवाल उठ रहा है कि कार रखना बेहतर है या राइड-हेलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद है।

In Short
- ₹20 लाख की कार रखने का कुल खर्च ₹60 हजार महीने से ज्यादा पहुंच सकता है।
- कैब और राइड-हेलिंग सेवाएं कई शहरी प्रोफेशनल्स के लिए कम खर्चीला विकल्प बन रही हैं।
- कार खरीदने का फैसला जरूरत, इस्तेमाल और लाइफस्टाइल के हिसाब से करना जरूरी है।
Car Maintenance Cost: कार खरीदना आज भी कई लोगों के लिए बड़ा सपना होता है। लोग इसे सुविधा और स्टेटस से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अब कार की बढ़ती कीमत, पेट्रोल का खर्च और मेंटेनेंस जैसी चीजों को देखते हुए कई लोग सोचने लगे हैं कि क्या खुद की कार रखना सच में फायदेमंद है या फिर ऐप से कैब बुक करना ज्यादा बेहतर विकल्प है?
इसका फैसला सिर्फ कार खरीदने की कीमत से नहीं होता, बल्कि इस बात से भी होता है कि आप कार का इस्तेमाल कितनी बार करते हैं और उसे रखने में हर महीने कितना खर्च आता है।
₹20 लाख की कार पर कितना खर्च?
अगर कोई व्यक्ति ₹20 लाख की कार खरीदता है और ₹4 लाख डाउन पेमेंट देकर पांच साल का लोन लेता है तो उसकी ईएमआई करीब ₹30 हजार से ₹32 हजार रुपये महीने तक हो सकती है।
इसके अलावा रोजाना 50 से 70 किलोमीटर कार चलाने पर पेट्रोल का खर्च करीब ₹20 हजार रुपये महीने तक पहुंच सकता है। कार की सर्विस, इंश्योरेंस, टायर बदलने और छोटे-बड़े रिपेयर पर भी हर महीने करीब ₹5 हजार से ₹8 हजार रुपये तक खर्च हो सकते हैं।
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यानी कार खरीदने के बाद सिर्फ उसकी किस्त ही नहीं, बल्कि उसे चलाने और संभालने का खर्च भी काफी ज्यादा होता है। लेकिन कार रखने में कुछ ऐसे खर्च भी होते हैं जिन पर लोग अक्सर ध्यान नहीं देते।
पार्किंग और कार की घटती कीमत
बड़े शहरों में पार्किंग भी एक बड़ी परेशानी और खर्च बन चुकी है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में कई लोगों को घर, ऑफिस या बाहर जाने पर पार्किंग के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं।
इसके अलावा नई कार खरीदते ही उसकी कीमत कम होने लगती है। समय बीतने के साथ कार की रीसेल वैल्यू घटती जाती है। यह खर्च हर महीने नजर नहीं आता, लेकिन कार रखने की कुल लागत में इसका बड़ा असर होता है।
अगर ईएमआई, पेट्रोल, मेंटेनेंस, पार्किंग और कार की घटती कीमत को जोड़ा जाए तो ₹20 लाख की कार रखने का खर्च हर महीने ₹60 हजार रुपये से ज्यादा हो सकता है।
कैब से चलने में कितना फायदा?
इसके मुकाबले अगर कोई व्यक्ति ऑफिस जाने, एयरपोर्ट जाने, मीटिंग या वीकेंड ट्रिप के लिए प्रीमियम कैब सेवाओं का इस्तेमाल करता है तो उसका खर्च करीब ₹40 हजार रुपये महीने तक आ सकता है।
कैब इस्तेमाल करने वालों को ईएमआई, इंश्योरेंस, सर्विसिंग, रिपेयर, पार्किंग और कार की कीमत कम होने जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। वे सिर्फ उतने सफर के लिए पैसे देते हैं, जितनी उन्हें जरूरत होती है।
कार खरीदना या कैब लेना?
कार खरीदना हर किसी के लिए गलत फैसला नहीं है। जिन लोगों का परिवार बड़ा है, जिन्हें रोज लंबी दूरी तय करनी होती है या जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा कम है, उनके लिए अपनी कार रखना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है।
वहीं जो लोग शहर में रहते हैं, रोज कार नहीं चलाते और कभी-कभार ही सफर करते हैं, उनके लिए कैब जैसी सेवाएं ज्यादा किफायती विकल्प बन सकती हैं।
इसलिए कार खरीदने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी जरूरत क्या है, साल में कितना सफर करते हैं और कार पर होने वाला खर्च आपकी आर्थिक योजना से कितना मेल खाता है। सही फैसला वही होगा जो आपकी जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से हो।