ऐसा लगा पहाड़ों से सुनामी आ रही है...21 तीर्थयात्रियों की रेस्क्यू की कहानी खड़े कर देगी रोंगटे
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री नेपाल में अचानक आई फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बीच फंस गए। जान बचाने के लिए उन्हें बस छोड़कर खड़ी पहाड़ी पर चढ़ना पड़ा। मुश्किल हालात में महिलाओं ने साड़ी को सहारा बनाया। आखिर वे सुरक्षित भारत कैसे पहुंचे?

In Short
- नेपाल के रसुवागढ़ी इलाके में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बीच फंसे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री सुरक्षित भारत लौट आए।
- जान बचाने के लिए यात्रियों ने बस छोड़कर खड़ी पहाड़ी पर चढ़ाई की। महिलाओं को ऊपर खींचने के लिए साड़ी का सहारा लिया गया।
- नेपाल में बाढ़ से 626 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,426 लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के लिए नेपाल का सफर 26 अगस्त को अचानक जान बचाने की जद्दोजहद में बदल गया। रसुवागढ़ी इलाके में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने सड़कें, इमारतें और बाजार बहा दिए। तीर्थयात्रियों को बस छोड़कर पहाड़ की खड़ी ढलान पर चढ़ना पड़ा।एक यात्री ने बताया, “ऐसा लगा जैसे पहाड़ों से सुनामी उतर रही हो।” पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे आ रहा था। नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे इलाके में तबाही सबसे ज्यादा रही।
साड़ी बनी सहारा, ढाई घंटे बाद पहुंची मदद
तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली की वल्लीनायकी और करपगम भी उसी बस में थीं, जो चीन सीमा की ओर जा रही थी। यात्रियों ने पहाड़ से धुएं जैसे दिख रहे मिट्टी और पत्थरों के गुबार को तेजी से नीचे आते देखा।
तत्काल मदद नहीं मिलने पर सभी 21 यात्री ड्राइवर की तरफ से बस से बाहर निकले और पहाड़ी पर चढ़ने लगे। कुछ महिलाओं को चढ़ने में परेशानी हुई तो यात्रियों ने साड़ी का सहारा लेकर उन्हें ऊपर खींचा। करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद समूह एक रेस्क्यू सेंटर तक पहुंचा।
नेपाल आर्मी ने निकाला, शुक्रवार को पहुंचे चेन्नई
तीर्थयात्रियों ने नेपाल आर्मी और स्थानीय अधिकारियों को बचाव का श्रेय दिया। उन्हें पहले काठमांडू और फिर नई दिल्ली लाया गया। शुक्रवार रात वे एयर इंडिया की फ्लाइट से चेन्नई पहुंचे, जहां उनके परिवार इंतजार कर रहे थे।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिल्ली में समूह से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि नेपाल आर्मी ने यात्रियों को “बहुत मुश्किल जगह” से निकाला। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने उनकी भारत वापसी में मदद की।
320 भारतीयों से अब भी संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, 320 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। भारतीय मूल के करीब 100 लोग भी संपर्क से बाहर हैं। वहीं, चीन की तरफ मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं।नेपाल के आपदा प्राधिकरण के अनुसार शनिवार तक बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 2,426 लोग लापता थे। भारत ने नेपाल को भोजन, दवाइयां, कंबल, सोलर लैंप और दूसरी जरूरी राहत सामग्री भी भेजी है।

