
पर्दे पर दमदार एक्टर, असल जिंदगी में गरीबों के मसीहा! नाना पाटेकर की दरियादिली की अनसुनी कहानी
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपने पीछे सिर्फ शानदार फिल्मों की यादें ही नहीं, बल्कि समाज सेवा की बड़ी मिसाल भी छोड़ गए। उन्होंने किसानों की मदद के लिए ₹1.5 करोड़ की लग्जरी कार खरीदने का फैसला तक बदल दिया था। जानिए कैसे उन्होंने लाखों जरूरतमंदों की जिंदगी बदलने में मदद की थी।

In Short
- दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर ने ₹1.5 करोड़ की लग्जरी कार छोड़कर किसानों की मदद करने का फैसला किया था।
- नाना पाटेकर ने नाम फाउंडेशन के जरिए लाखों किसानों और जरूरतमंद परिवारों की मदद की थी।
- उन्होंने महाराष्ट्र के दो गांवों को गोद लिया था और जम्मू-कश्मीर में भी जरूरतमंदों की मदद की थी।
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। नाना पाटेकर अपनी शानदार एक्टिंग और दमदार डायलॉग्स के लिए जाने जाते थे। लेकिन फिल्मों के अलावा उन्होंने समाज के लिए भी काफी काम किया। खासकर किसानों और सूखे से परेशान गांवों की मदद के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा समर्पित किया।
₹1.5 करोड़ की कार छोड़ किसानों की मदद का लिया फैसला
साल 2015 में नाना पाटेकर ने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर पुणे में नाम फाउंडेशन (Naam Foundation) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सूखे और कर्ज से परेशान किसानों की मदद करना था।
बताया जाता है कि नाना पाटेकर करीब ₹1.5 करोड़ की लग्जरी कार खरीदने वाले थे। लेकिन उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और इस पैसे से विदर्भ और मराठवाड़ा में आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों की मदद करने का फैसला किया।
77 लाख से ज्यादा किसानों की मदद
नाम फाउंडेशन अब तक 77.17 लाख किसानों की मदद कर चुका है। इसके अलावा 50,908 परिवारों को आपदा राहत, सेना के 102 शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता और 4,957 विधवा महिलाओं को मदद दी गई है।
शुरुआत में फाउंडेशन ने किसानों की विधवाओं और परिवारों को ₹15,000 से ₹25,000 तक के चेक दिए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीन, आटा चक्की और बकरियां भी दी गईं। किसानों के बच्चों की पढ़ाई, भोजन और रहने की व्यवस्था भी की गई।
दो गांवों को लिया था गोद
नाना पाटेकर के फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के दो गांवों को गोद लिया था। इनमें छत्रपति संभाजीनगर जिले का धोंडल गांव और वर्धा जिले का आमला गांव शामिल हैं।

इन गांवों को पानी के टैंकरों पर निर्भरता से मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया। इसके लिए जल संरक्षण, खेती, रोजगार और बच्चों की शिक्षा पर काम किया गया।
जम्मू-कश्मीर में भी बढ़ाया मदद का हाथ
नाना पाटेकर ने महाराष्ट्र के बाहर भी जरूरतमंद लोगों की मदद की। जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में सीमा पार से गोलाबारी से प्रभावित परिवारों के लिए उन्होंने ₹42 लाख की सहायता दी। साथ ही कई स्कूलों को गोद लिया और सेना के साथ कौशल विकास से जुड़े काम किए।
उन्होंने बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों की भी मदद की।
कमाई का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाया
नाना पाटेकर सादगी भरी जिंदगी जीने के लिए जाने जाते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह फिल्मों से होने वाली कमाई और पुरस्कारों से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में दान करते थे।
उनके फाउंडेशन ने पेड़ लगाने, नदियों को दोबारा जीवित करने, किसानों को ट्रेनिंग देने और महिलाओं के लिए रोजगार पैदा करने पर भी काम किया। खास बात यह रही कि नाना पाटेकर ने अपने इन कामों का कभी ज्यादा प्रचार नहीं किया।

