बेंगलुरु-मंगलुरु सफर होगा आसान, वंदे भारत ने शिराडी घाट के 57 सुरंगों वाले रास्ते पर भरी रफ्तार
शिराडी घाट की 57 सुरंगों वाले मुश्किल रास्ते पर वंदे भारत ट्रेन ने सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। यह ट्रायल बेंगलुरु-मंगलुरु रेल कनेक्शन के लिए अहम कदम माना जा रहा है, हालांकि सेवा शुरू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

वंदे भारत ट्रेन ने बेंगलुरु-मंगलुरु रेल कॉरिडोर के सबसे मुश्किल हिस्से माने जाने वाले सकलेशपुर से सुब्रमण्या रोड के बीच सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। 12 अगस्त 2026 को हुए इस ट्रायल में ट्रेन ने 55 किमी लंबे घाट सेक्शन पर दोनों दिशाओं में सफर किया। इस रूट पर 57 सुरंगें हैं, इसलिए यहां ट्रेन चलाना रेलवे के लिए बड़ी तकनीकी चुनौती माना जाता है। अब इस ट्रायल के बाद इस रूट पर वंदे भारत सेवा शुरू करने की तैयारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सकलेशपुर-सुब्रमण्या रोड सेक्शन में तेज ढलान और पहाड़ी रास्ते होने की वजह से ट्रेन की स्पीड को करीब 30 किमी प्रति घंटे तक सीमित रखा जाता है। ट्रायल से पहले रिपोर्ट्स में बताया गया था कि आठ कोच वाली वंदे भारत ट्रेन में ऑटो इमरजेंसी ब्रेक सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम जरूरत पड़ने पर तय स्पीड से ज्यादा चलने पर खुद एक्टिव होकर ट्रेन की सुरक्षा में मदद करता है।

इस सफल ट्रायल से बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत कनेक्शन को मजबूती मिली है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अलग से बताया था कि आगे चलकर इस सेवा को मडगांव तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, अभी तक ट्रेन का फाइनल रूट, शुरुआती स्टेशन और टर्मिनल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

ट्रायल पूरा होना रेलवे के लिए एक बड़ा तकनीकी कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सेवा तुरंत शुरू हो जाएगी। वंदे भारत के कमर्शियल संचालन से पहले रेलवे को आगे की जांच और जरूरी अप्रूवल पूरे करने होंगे। अभी तक ट्रेन नंबर, टाइम टेबल, किराया और किन-किन स्टेशनों पर इसका ठहराव होगा, इसकी जानकारी जारी नहीं की गई है।

शिराडी घाट का यह हिस्सा भारतीय रेलवे के सबसे चुनौतीपूर्ण रेल सेक्शन में से एक है। पहाड़ी इलाका, कई सुरंगें और सीमित स्पीड के कारण यहां ट्रेन संचालन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। वंदे भारत का सफल ट्रायल इस बात का संकेत है कि आधुनिक ट्रेन टेक्नोलॉजी अब ऐसे कठिन रूट पर भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है।
