क्या होता है सोलर स्टॉर्म और कितना है इंसानों को खतरा? NASA ने बताया CME का असली असर
सूरज से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन यानी CME को लेकर अक्सर धरती पर खतरे की चर्चा होती है। NASA और NOAA के मुताबिक, ये विशाल प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के बादल होते हैं, जो सैटेलाइट, पावर ग्रिड और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन इंसानों को सीधे नुकसान नहीं पहुंचाते।

CME की गतिविधि सूर्य के करीब 11 साल के चक्र से जुड़ी होती है। NASA के अनुसार, सोलर मिनिमम के समय करीब एक CME प्रति सप्ताह और सोलर मैक्सिमम के समय औसतन दो से तीन CME रोजाना हो सकते हैं। अगर CME सही दिशा में धरती की ओर आता है, तो यह जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म पैदा कर सकता है। इसके कारण पावर ग्रिड में बदलाव, सैटेलाइट संचालन में समस्या, नेविगेशन में गलती और जियोमैग्नेटिक करंट जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

सोलर एक्टिविटी धरती के ऊपरी वायुमंडल को गर्म और फैला सकती है, जिससे लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स पर ड्रैग बढ़ सकता है। NASA के नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी में बढ़े हुए वायुमंडलीय ड्रैग के कारण ऑर्बिट में बदलाव की जरूरत पड़ी। अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेडिएशन का खतरा ज्यादा सीधे तौर पर सोलर एनर्जेटिक पार्टिकल इवेंट्स से जुड़ा होता है, जो बड़े सोलर विस्फोटों के साथ हो सकते हैं। धरती के मैग्नेटोस्फेयर से बाहर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है।




