शेयर बाजार, गोल्ड या डेट फंड? 10 लाख रुपये कहां लगाएं कि मिले अच्छा रिटर्न, एक्सपर्ट्स ने समझाया पूरा गणित
अगर आपके पास 10 लाख रुपये हैं और आप अगले 8 से 10 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो पैसा कहां लगाना बेहतर होगा? शेयर बाजार, गोल्ड और डेट में कितना हिस्सा रखना चाहिए? दो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने अलग-अलग रणनीतियां बताई हैं। जानिए किसका निवेश फॉर्मूला क्या है।

In Short
- 10 लाख रुपये के निवेश पर एक्सपर्ट्स की राय, अगले 8 से 10 साल के लिए बताया पोर्टफोलियो बनाने का तरीका।
- इक्विटी में 60% से 80% तक निवेश का सुझाव, गोल्ड और डेट में भी पैसा लगाने की सलाह।
- बाजार की तेजी के पीछे भागने से बचें, अपने लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से करें निवेश।
अगर आपके पास निवेश के लिए 10 लाख रुपये हैं और आप अगले 8 से 10 साल तक इस पैसे को इस्तेमाल नहीं करना चाहते, तो इसे कहां लगाना बेहतर होगा? शेयर बाजार, सोना या डेट फंड में कितना पैसा निवेश करना चाहिए? बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए पीबी इन्वेस्टमेंट्स की सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पूजा भिंडे ने कहा कि बाजार में कब तेजी आएगी या कब गिरावट होगी, इसका अंदाजा लगाने के बजाय सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
10 लाख रुपये का निवेश कैसे करें?
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पूजा विंदे ने 10 लाख रुपये के निवेश के लिए एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो बनाने की सलाह दी। उनके मुताबिक, कुल रकम का 60 फीसदी हिस्सा इक्विटी, 25 फीसदी डेट, 10 फीसदी गोल्ड और 5 फीसदी लिक्विड या इमरजेंसी फंड में रखना चाहिए।
इस हिसाब से 10 लाख रुपये में से 6 लाख रुपये इक्विटी, 2.5 लाख रुपये डेट, 1 लाख रुपये गोल्ड और 50 हजार रुपये लिक्विड फंड में लगाए जा सकते हैं।
इक्विटी के 6 लाख रुपये में से 3 लाख रुपये फ्लेक्सी कैप फंड और बाकी 3 लाख रुपये मिड और स्मॉल कैप में निवेश करने का सुझाव दिया गया।
70 से 80 फीसदी पैसा शेयर बाजार में लगाने की सलाह
वहीं, Roongta Securities के सीईओ हर्षवर्धन रूंगटा ने लंबी अवधि के निवेशकों के लिए थोड़ा अलग नजरिया रखा। उनका कहना है कि अगर किसी निवेशक को अगले 8 से 10 साल तक पैसों की जरूरत नहीं है, तो वह अपने पोर्टफोलियो का 70 से 80 फीसदी हिस्सा इक्विटी में रख सकता है।
इसके अलावा करीब 10 फीसदी कीमती धातुओं और लगभग 10 फीसदी डेट में निवेश किया जा सकता है।
रूंगटा के मुताबिक, लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी में ज्यादा निवेश फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को सलाह देने वाले एक्सपर्ट की जोखिम लेने की सोच को भी समझना चाहिए।
बाजार की तेजी देखकर निवेश करना सही नहीं
पिछले कुछ समय में शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़त के बाद आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि सिर्फ किसी एसेट की हालिया तेजी देखकर उसमें पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है। FOMO यानी मौका छूट जाने के डर से निवेश करने और बाजार गिरने पर SIP बंद करने से भी बचना चाहिए।
हर निवेशक के लिए एक जैसा फॉर्मूला नहीं
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश का सही बंटवारा व्यक्ति के लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक इक्विटी में अधिक पैसा लगा सकते हैं, जबकि सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले डेट में ज्यादा हिस्सा रख सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि बाजार की भावनाओं में बहने के बजाय समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस किया जाए।

