REITs में निवेश करने वालों के लिए जरूरी खबर! 90% कमाई बांटने का नियम, फिर भी क्यों हो सकता है नुकसान?
बिना घर या ऑफिस खरीदे रियल एस्टेट से कमाई का विकल्प REITs निवेशकों के बीच चर्चा में है। लेकिन क्या इनमें मिलने वाला रिटर्न सुरक्षित है? शेयर बाजार में गिरावट आने पर निवेशकों का पैसा कितना प्रभावित हो सकता है? बिजनेस टुडे से बातचीत में एक्सपर्ट संचिता मुखर्जी ने REITs की कमाई, 90% नकदी प्रवाह वितरण के नियम और भारत-अमेरिका के बाजार में अंतर समझाया।

In Short
- REITs से किराये की आय और यूनिट की कीमत बढ़ने पर कैपिटल गेन, दोनों का अवसर मिलता है।
- भारतीय REITs को कम से कम 90% शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह निवेशकों में बांटना होता है, लेकिन रिटर्न गारंटीड नहीं है।
- - भारत में GCCs और बड़ी कंपनियों से ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत है, जबकि अमेरिका के ऑफिस सेक्टर में चुनौतियां बनी हुई हैं।
रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए अब लाखों-करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदना जरूरी नहीं है। रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs के जरिए निवेशक कमर्शियल प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी ले सकते हैं। हालांकि, शेयर बाजार में लिस्टेड होने के कारण REITs की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि REITs से कितना रिटर्न मिल सकता है और क्या इसमें निवेश किया गया पैसा डूबने का खतरा भी है?
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए टॉक द वॉक एलएलपी की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि REITs में निवेश करने से पहले इसके दो प्रमुख पहलुओं को समझना जरूरी है। पहला, यूनिट की कीमत बढ़ने से होने वाला कैपिटल गेन और दूसरा, कमर्शियल प्रॉपर्टी से होने वाली नियमित आय। उन्होंने स्पष्ट किया कि REITs से मिलने वाला रिटर्न गारंटीड नहीं होता।
शेयर बाजार गिरा तो REITs में भी हो सकता है नुकसान
संचिता मुखर्जी ने बताया कि REITs शेयर बाजार में लिस्टेड होते हैं। इसलिए इनकी यूनिट की कीमतें बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से बढ़ या घट सकती हैं।
अगर बाजार में तेजी आती है और REIT की कीमत बढ़ती है, तो निवेशकों को कैपिटल गेन मिल सकता है। लेकिन बाजार में गिरावट के दौरान REIT की कीमत कम होने पर निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
खासकर अगर कोई निवेशक गिरावट के समय अपनी यूनिट बेचता है, तो उसे खरीद मूल्य से कम रकम मिल सकती है।
REITs से निवेशकों को कैसे मिलती है कमाई?
REITs की एक खासियत कमर्शियल प्रॉपर्टी से मिलने वाली आय है। ऑफिस स्पेस और दूसरी किराये वाली संपत्तियों से होने वाली कमाई का एक हिस्सा निवेशकों को वितरित किया जाता है।
नियमों के तहत भारतीय REITs को अपने शुद्ध वितरण योग्य नकदी प्रवाह यानी Net Distributable Cash Flow (NDCF) का कम से कम 90% यूनिटधारकों में बांटना होता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशकों को हर साल निश्चित रकम मिलेगी। किराये की आय, प्रॉपर्टी की ऑक्यूपेंसी, लीजिंग और दूसरे खर्चों के आधार पर वितरण बदल सकता है।
अमेरिका में REITs के प्रदर्शन से क्या सीख मिलती है?
संचिता मुखर्जी ने अमेरिकी बाजार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कमर्शियल रियल एस्टेट, खासकर ऑफिस सेक्टर, पिछले कुछ वर्षों में चुनौतियों का सामना कर रहा है।
ऑफिस में खाली जगहों की संख्या बढ़ने और प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन घटने से कई ऑफिस-केंद्रित REITs के प्रदर्शन पर दबाव पड़ा है।
उनके मुताबिक, इससे साफ होता है कि REITs का प्रदर्शन सिर्फ शेयर बाजार की तेजी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संबंधित रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
भारत में REITs के लिए क्यों दिख रहे बेहतर अवसर?
मुखर्जी के अनुसार, भारत में फिलहाल कमर्शियल ऑफिस स्पेस की मांग मजबूत बनी हुई है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बैंक, वित्तीय संस्थान और मल्टीनेशनल कंपनियां आधुनिक ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियां भी कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
मजबूत ऑक्यूपेंसी और लीजिंग से REITs की किराये की आय को सहारा मिल सकता है। हालांकि, हर REIT की संपत्तियां और जोखिम अलग-अलग होते हैं।
REITs में पैसा लगाने से पहले क्या देखें?
निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न के आधार पर REIT नहीं चुनना चाहिए। प्रॉपर्टी की ऑक्यूपेंसी, किराये से होने वाली कमाई, कर्ज, कैश फ्लो और यूनिट की मौजूदा कीमत का आकलन भी जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि REITs नियमित आय का अवसर दे सकते हैं, लेकिन न तो उनकी यूनिट की कीमत बढ़ने की गारंटी है और न ही मिलने वाले वितरण की। इसलिए निवेश का फैसला अपनी वित्तीय जरूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार करना चाहिए।

