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पहली बार Mutual Fund में निवेश करने जा रहे हैं? जानें कौन सी कैटेगरी है आपके लिए सही और कैसे करें चुनाव

पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आखिर किस फंड में पैसा लगाएं। इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और पैसिव फंड में क्या अंतर है और कौन सा विकल्प आपकी जरूरत के हिसाब से सही हो सकता है? जानिए निवेश शुरू करने से पहले किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है और कौन सी गलतियों से बचना चाहिए।

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पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले सही कैटेगरी का चुनाव जरूरी (AI Generated Image)
पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले सही कैटेगरी का चुनाव जरूरी (AI Generated Image)

In Short

  • पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को अपने लक्ष्य और निवेश की अवधि के हिसाब से कैटेगरी चुननी चाहिए।
  • इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और पैसिव फंड में निवेश का तरीका और जोखिम अलग-अलग होते हैं।
  • सिर्फ पिछले रिटर्न या फंड की रेटिंग देखकर निवेश न करें, एक्सपेंस रेशियो और पोर्टफोलियो भी जांचें।

अगर आप पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने जा रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि किस फंड में पैसा लगाएं। कई लोग ऐसे फंड चुन लेते हैं, जिन्होंने हाल में अच्छा रिटर्न दिया है। लेकिन सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर निवेश करना सही तरीका नहीं है। फंड चुनने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप पैसा किस मकसद से लगा रहे हैं, कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं और कितना जोखिम उठा सकते हैं।

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पहली बार निवेश करने वालों के लिए कौन सा फंड सही?

हर नए निवेशक के लिए एक ही म्यूचुअल फंड कैटेगरी सही नहीं होती।

अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव सह सकते हैं, तो इक्विटी फंड पर विचार कर सकते हैं।

वहीं अगर आप शेयर बाजार और डेट दोनों में पैसा लगाना चाहते हैं, तो हाइब्रिड फंड एक विकल्प हो सकता है।

कम समय के लिए निवेश करने वाले या कम जोखिम उठाने वाले लोग अपनी जरूरत के हिसाब से डेट फंड की कैटेगरी देख सकते हैं।

म्यूचुअल फंड की कौन-कौन सी कैटेगरी हैं?

1. इक्विटी फंड: ये फंड मुख्य रूप से शेयरों में निवेश करते हैं। इनमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन बाजार गिरने पर नुकसान का जोखिम भी रहता है।

2. डेट फंड: ये फंड बॉन्ड और दूसरे फिक्स्ड इनकम विकल्पों में निवेश करते हैं। इनमें भी ब्याज दरों में बदलाव और कर्ज चुकाने से जुड़े जोखिम होते हैं।

3. हाइब्रिड फंड: इनमें आमतौर पर इक्विटी और डेट दोनों में पैसा लगाया जाता है। इससे निवेशक एक ही फंड के जरिए अलग-अलग तरह के निवेश कर सकते हैं।

4. पैसिव फंड: इंडेक्स फंड जैसे विकल्प किसी तय मार्केट इंडेक्स को फॉलो करते हैं। इनमें फंड मैनेजर अपनी पसंद से शेयर चुनने के बजाय इंडेक्स के मुताबिक निवेश करता है।

कितने साल के लिए निवेश करना है, यह क्यों जरूरी?

म्यूचुअल फंड चुनते समय यह तय करना जरूरी है कि आपको पैसों की जरूरत कब पड़ेगी।

मान लीजिए आप 12 साल बाद किसी बड़े खर्च के लिए पैसा जमा कर रहे हैं और बाजार की गिरावट सह सकते हैं। ऐसे में इक्विटी या बड़े मार्केट इंडेक्स को फॉलो करने वाले फंड पर विचार किया जा सकता है।

लेकिन अगर आपको सिर्फ दो साल बाद पैसों की जरूरत है, तो आपकी निवेश की रणनीति अलग होनी चाहिए।

यानी फंड चुनने से पहले अपने लक्ष्य और निवेश की अवधि को समझना जरूरी है।

ज्यादा रिटर्न के साथ कितना जोखिम?

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म्यूचुअल फंड में ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ ज्यादा जोखिम भी हो सकता है।

इक्विटी फंड में शेयर बाजार की वजह से निवेश की वैल्यू तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती है।

वहीं डेट फंड में ब्याज दरों में बदलाव और बॉन्ड जारी करने वाली संस्था की आर्थिक स्थिति का असर पड़ सकता है।

इसलिए किसी फंड के पिछले अच्छे रिटर्न को भविष्य की कमाई की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

नए निवेशक किन गलतियों से बचें?

पहली बार म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले निवेशकों को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

  • सिर्फ पिछले कुछ महीनों के ज्यादा रिटर्न को देखकर फंड न चुनें।

  • फंड की अच्छी रेटिंग को भविष्य के रिटर्न की गारंटी न मानें।

  • दोस्तों या सोशल मीडिया की सलाह पर बिना समझे निवेश न करें।

  • अलग-अलग नाम वाले कई एक जैसे फंड खरीदने से बचें।

  • निवेश से पहले फंड का एक्सपेंस रेशियो और पोर्टफोलियो जरूर देखें।

पहली बार फंड चुनते समय क्या करें?

सबसे पहले तय करें कि आप किस लक्ष्य के लिए निवेश कर रहे हैं। इसके बाद देखें कि कितने समय तक पैसा लगाए रख सकते हैं।

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फिर यह समझें कि बाजार गिरने पर आप कितना नुकसान सह सकते हैं।

इन बातों के आधार पर इक्विटी, डेट, हाइब्रिड या पैसिव फंड की कैटेगरी की तुलना करें।

ध्यान रखें: पहली बार निवेश करने वालों के लिए सबसे जरूरी बात ज्यादा रिटर्न वाला फंड ढूंढना नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से सही कैटेगरी चुनना है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।