
कितने तरह के होते हैं इक्विटी म्यूचुअल फंड? ज्यादातर निवेशक नहीं जानते जवाब
Equity Mutual Funds: शेयर बाजार में सीधे निवेश करने के बजाय इक्विटी म्यूचुअल फंड के जरिए भी पैसा लगाया जा सकता है। इनमें लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप और फ्लेक्सी कैप जैसे कई ऑप्शन मौजूद हैं। जानिए इन फंड्स में क्या अंतर है, निवेश के क्या फायदे हैं और टैक्स बचाने का मौका कैसे मिलता है।

In Short
- इक्विटी म्यूचुअल फंड क्या होते हैं और इनमें निवेश करने से क्या फायदे मिल सकते हैं?
- लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप और फ्लेक्सी कैप फंड में निवेश के तरीके और जोखिम अलग-अलग होते हैं।
- ELSS में तीन साल का लॉक-इन होता है और टैक्स बचाने का मौका मिलता है।
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन खुद शेयर चुनने और बाजार पर नजर रखने की परेशानी से बचना चाहते हैं, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड एक विकल्प हो सकते हैं. आज निवेशकों के पास अलग-अलग तरह की म्यूचुअल फंड स्कीमें मौजूद हैं. बाजार नियामक सेबी (SEBI) एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को अलग-अलग निवेश उद्देश्यों वाली स्कीमें पेश करने की अनुमति देता है. निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से इनमें निवेश कर सकते हैं.
इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?
इक्विटी का मतलब किसी कंपनी में हिस्सेदारी से है. जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के आंशिक मालिक बन जाते हैं. शेयरों की कीमत कंपनी की वित्तीय स्थिति, आर्थिक माहौल और ब्याज दरों जैसे कई कारणों से बदलती रहती है.
वहीं, इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों का पैसा अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में लगाते हैं. इन फंड्स को प्रोफेशनल फंड मैनेजर संभालते हैं. लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने और शेयर बाजार में निवेश करने के इच्छुक लोगों के लिए ये एक विकल्प हो सकते हैं.
इक्विटी म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं?
1. लार्ज कैप फंड: ये फंड अपनी कम से कम 80 फीसदी रकम देश की मार्केट कैप के लिहाज से टॉप 100 कंपनियों में लगाते हैं. ये कंपनियां आमतौर पर स्थापित होती हैं और इनमें उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत कम होता है.
2. मिड कैप फंड: ये कम से कम 65 फीसदी निवेश मार्केट कैप के आधार पर 101 से 250वें स्थान वाली कंपनियों में करते हैं. इनमें अच्छे रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी ज्यादा हो सकता है.
3. लार्ज एंड मिड कैप फंड: इनमें कम से कम 35 फीसदी रकम लार्ज कैप और 35 फीसदी मिड कैप कंपनियों में लगाई जाती है. बाकी रकम अन्य अनुमत निवेश विकल्पों में लगाई जा सकती है.
4. स्मॉल कैप फंड: ये कम से कम 65 फीसदी रकम मार्केट कैप रैंकिंग में 251वें स्थान से नीचे की कंपनियों में निवेश करते हैं. इनमें ज्यादा रिटर्न की संभावना के साथ उतार-चढ़ाव भी अधिक होता है.
5. फ्लेक्सी कैप फंड: ये लार्ज, मिड और स्मॉल कैप, तीनों तरह की कंपनियों में निवेश करते हैं. इससे पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलती है.
सेक्टोरल और वैल्यू फंड क्या होते हैं?
सेक्टोरल फंड टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट या FMCG जैसे किसी खास सेक्टर में निवेश करते हैं. वहीं, कॉन्ट्रा और वैल्यू फंड ऐसी कंपनियों के शेयर चुनते हैं, जिनके प्रदर्शन में लंबी अवधि में सुधार की उम्मीद होती है.

टैक्स बचाने का भी मिलता है ऑप्शन
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम यानी ELSS एक टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड है. इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है. इसके जरिए इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत टैक्स कटौती का लाभ मिल सकता है.
इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश के फायदे
इक्विटी म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना देते हैं. ये महंगाई के असर से मुकाबला करने में भी मददगार हो सकते हैं. अलग-अलग कंपनियों और सेक्टर्स में निवेश होने से जोखिम को बांटने में मदद मिलती है. इसके अलावा प्रोफेशनल फंड मैनेजर बाजार का विश्लेषण करके निवेश से जुड़े फैसले लेते हैं.

