भारत की ग्रोथ को लेकर RBI ने बढ़ाया अनुमान, गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताई 7.1% की रफ्तार
RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC के फैसलों के दौरान इस साल के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया। RBI ने Q2 और Q3 के अनुमान भी बढ़ाए हैं, हालांकि आगे कुछ जोखिम बने रहने की बात कही गई है।

In Short
- RBI ने इस साल के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया।
- Q2 के लिए ग्रोथ अनुमान 7.2% और Q3 के लिए 6.9% किया गया है।
- - RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की आर्थिक ग्रोथ को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC के फैसलों का ऐलान करते हुए इस साल के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% कर दिया है। अगस्त में RBI ने ग्रोथ का अनुमान 6.7% रखा था। यानी इसमें 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है।
अलग-अलग तीन महीनों के लिए कितना अनुमान?
RBI ने अगले तीन महीने की अवधि यानी Q2 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 7.2% कर दिया है। वहीं Q3 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.9% किया गया है।
चौथी तीन महीने की अवधि यानी Q4 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: RBI
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने मजबूती दिखाई है। दूसरी तीन महीने की अवधि में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि मानसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा बना हुआ है। सर्विस सेक्टर में भी स्थिरता है। लोगों का खर्च मजबूत बना हुआ है और निवेश की स्थिति भी अच्छी है।
हालांकि, गवर्नर ने कहा कि मजबूत El Nino का असर आने वाले रबी सीजन पर पड़ सकता है।
World Bank ने भी लगाया 7.1% ग्रोथ का अनुमान
RBI से पहले World Bank ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया था। इससे पहले उसका अनुमान 6.6% था।
वहीं Moody’s Ratings ने भी भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। Moody’s ने मजबूत निजी खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च, निजी निवेश में सुधार और सर्विस सेक्टर की मजबूती को इसकी वजह बताया है।
हालांकि, West Asia में जारी तनाव, ऊर्जा की कीमतें, महंगाई, मानसून और दुनिया में बनी अनिश्चितता आगे ग्रोथ के लिए जोखिम बने रह सकते हैं।

