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भारतीय बैंकों ने बनाया नया रिकॉर्ड, डॉलर बॉन्ड बिक्री 8 अरब डॉलर के पार पहुंची आरबीआई की सुविधा से मिली रफ्तार

भारतीय बैंकों ने विदेशी बाजार से फंड जुटाने में नया रिकॉर्ड बना दिया है। डॉलर बॉन्ड बिक्री 8 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है। आरबीआई की कम लागत वाली विदेशी मुद्रा सुविधा के चलते बैंकों ने उधारी तेज की है। जानिए इस रिकॉर्ड के पीछे क्या वजह है और आगे क्या असर होगा।

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AI Generated Image

In Short

  • भारतीय वित्तीय संस्थानों की डॉलर बॉन्ड बिक्री 8 अरब डॉलर पहुंची, 2019 का रिकॉर्ड टूटा।
  • आरबीआई की विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा से बैंकों को कम लागत पर फंड जुटाने में मदद मिली।
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक समेत कई बैंकों ने डॉलर बॉन्ड बाजार का रुख किया।

भारतीय वित्तीय संस्थानों ने इस साल अब तक रिकॉर्ड 8 अरब डॉलर के डॉलर बॉन्ड बेच दिए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने यह कदम विदेशी बाजार से फंड जुटाने और भारतीय रिजर्व बैंक की कम लागत वाली सुविधा का फायदा उठाने के लिए उठाया है। डॉलर बॉन्ड बिक्री में तेजी के पीछे आरबीआई की खास विदेशी मुद्रा सुविधा बड़ी वजह बनी है।

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आरबीआई की सुविधा के बाद बैंकों ने तेज की बॉन्ड बिक्री

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय वित्तीय संस्थानों की डॉलर बॉन्ड बिक्री गुरुवार को 8 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यह 2019 में बने 7.92 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड से ज्यादा है। अगस्त महीने में ही कम से कम चार संस्थानों ने इस बाजार का रुख किया, जिनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं। यह महीना डॉलर बॉन्ड उधारी के लिए अब तक का सबसे व्यस्त महीना रहा है।

कमजोर रुपये को संभालने के लिए शुरू हुई थी खास सुविधा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक ने जून की शुरुआत में बैंकों और सरकारी कंपनियों के लिए कम लागत वाली विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा शुरू की थी। इसका मकसद कमजोर होते रुपये को सहारा देना, घरेलू लिक्विडिटी बढ़ाना और क्रेडिट ग्रोथ को समर्थन देना था। यह खास उधारी सुविधा 31 दिसंबर तक उपलब्ध है, इसलिए कई बैंक तेजी से डॉलर बॉन्ड जारी कर रहे हैं।

विदेशी मुद्रा जमा वाली सुविधा बंद होने से बढ़ी हलचल

रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने जून में विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए एक अलग सुविधा भी शुरू की थी। लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय बैंक ने इस सुविधा को तय समय से एक महीने पहले बंद कर दिया। इसके बाद छोटी अवधि वाले भारतीय बॉन्ड में गिरावट देखी गई, क्योंकि बाजार में रुपये की लिक्विडिटी को लेकर चिंता बढ़ी। हालांकि, विदेशी उधारी सुविधा की समयसीमा में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बैंकों ने विदेशों से जमा जुटाने के लिए बढ़ाई उधारी

रिपोर्ट के मुताबिक, नोमुरा होल्डिंग्स के एशिया क्रेडिट डेस्क एनालिस्ट निकोलस याप के मुताबिक भारतीय बैंकों की डॉलर बॉन्ड बिक्री में तेजी का मुख्य कारण विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जमा आकर्षित करने की कोशिश है। उनका कहना है कि आरबीआई की जमा स्वैप सुविधा जल्दी बंद होने के बाद आने वाले कुछ हफ्तों में बैंक डॉलर बॉन्ड बाजार में और सक्रिय हो सकते हैं।

वित्तीय संस्थानों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

इस साल भारतीय कंपनियों की कुल डॉलर उधारी में करीब दो-तिहाई हिस्सा वित्तीय संस्थानों का रहा है। ऊंची हेजिंग लागत के कारण साल की शुरुआत में बाजार कमजोर था, लेकिन आरबीआई की सुविधा के बाद बैंकों को कम लागत पर विदेशी फंड जुटाने का मौका मिला। यह सुविधा कम से कम तीन साल की औसत अवधि वाली उधारी पर सालाना 1.5 प्रतिशत की तय दर देती है।

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आगे और बढ़ सकती है डॉलर बॉन्ड बिक्री

डॉलर बॉन्ड बाजार में आगे भी तेजी रहने की उम्मीद है। कोटक महिंद्रा बैंक और यस बैंक ने संभावित बड़े डॉलर बॉन्ड जारी करने के लिए सलाहकार नियुक्त किए हैं। सिटीग्रुप के अनुसार निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के बैंक इस बढ़ती मांग का फायदा उठा रहे हैं। मजबूत वैश्विक निवेश मांग के कारण हाल की डील शुरुआती अनुमान से बेहतर दरों पर पूरी हुई हैं, जो भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी को दिखाता है।