
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत दौरा, ट्रेड डील समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई में एस जयशंकर से मुलाकात करेंगे। बैठक में टैरिफ विवाद रूस से तेल खरीद रक्षा सहयोग और पश्चिम एशिया संकट जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

In Short
- जयशंकर और मार्को रुबियो की बैठक में ट्रेड डील पर चर्चा होगी।
- रूस से तेल खरीद और अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भी उठेगा।
- रक्षा सहयोग ऊर्जा सप्लाई और पश्चिम एशिया संकट पर होगी बात।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर हलचल तेज हो गई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को मुंबई में मुलाकात करेंगे। इस बैठक में व्यापार समझौते के अलावा ऊर्जा सप्लाई, रक्षा सहयोग और पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देश ऐसे समय में बातचीत कर रहे हैं, जब अमेरिकी टैरिफ समेत कई मुद्दों को लेकर द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बना हुआ है।
ट्रेड डील पर क्या बोले मार्को रुबियो?
भारत दौरे पर आ रहे मार्को रुबियो ने कहा है कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। सोमवार को उज्बेकिस्तान के समरकंद में उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
रुबियो ने यह भी संकेत दिया कि ट्रेड डील का असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है। इसमें भारत की ओर से रूस से तेल खरीदने से जुड़े टैरिफ पर छूट जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से इस प्रस्तावित समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य टैरिफ विवादों को सुलझाना, गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर करना है। भारत चाहता है कि उसके निर्यात पर प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक अनुकूल टैरिफ लगाए जाएं।

ऊर्जा सप्लाई और पश्चिम एशिया संकट पर भी नजर
बैठक में ऊर्जा सहयोग और पश्चिम एशिया में जारी संकट पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है और भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है।
रुबियो ने कहा कि ऊर्जा के स्रोत बदलना आसान नहीं होता। किसी भी देश की विदेश नीति तय करते समय उसके भौगोलिक हालात, ऊर्जा की उपलब्धता और दूसरे देशों के साथ संबंधों को ध्यान में रखना पड़ता है।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि एक मुद्दे के कारण दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
भारतीय रिफाइनरियों के लिए तेल की गुणवत्ता अहम
भारत की रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्य पूर्व और रूस से मिलने वाले मीडियम-सॉर कच्चे तेल को प्रोसेस करने के हिसाब से तैयार हैं। इसके मुकाबले वेनेजुएला का तेल ज्यादा भारी होता है, जबकि अमेरिका से मिलने वाला तेल हल्की श्रेणी का है। अमेरिकी तेल को भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल करने के लिए दूसरे तेल के साथ मिलाना पड़ सकता है।
मुंबई से जामनगर तक रहेगा रुबियो का दौरा
मार्को रुबियो तीन दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह इस साल उनकी दूसरी भारत यात्रा है। वह मंगलवार दोपहर 2:15 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे।
मुंबई में वह 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों की याद में बने ताज मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इन हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी। इसके बाद वह अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। बुधवार को उनका जामनगर जाने का कार्यक्रम है।
कई मुद्दों पर पहले से बना हुआ है तनाव
भारत और अमेरिका के संबंधों में हाल के समय में कई मुद्दों पर खींचतान रही है। इनमें अमेरिकी दंडात्मक टैरिफ, मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव को कम कराने में अपनी भूमिका को लेकर वॉशिंगटन के दावे, H-1B वीजा फीस में बढ़ोतरी और बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड प्रोसेसिंग पर असर डालने वाली पाबंदियां शामिल हैं। ऐसे में जयशंकर और रुबियो की बैठक को व्यापार और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

