भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण फाइनल, पीयूष गोयल ने बताया कब लागू होगा समझौता
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि समझौते का पहला चरण फाइनल हो चुका है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले कुछ अहम शर्तें पूरी होनी बाकी हैं। जानिए टैरिफ पर क्या है भारत की मांग और कब हो सकती है डील।

In Short
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण फाइनल, कानूनी ड्राफ्टिंग का काम जारी।
- टैरिफ पर बेहतर शर्तें मिलने के बाद लागू होगा समझौता, पीयूष गोयल ने दी जानकारी।
- कनाडा के साथ भी ट्रेड डील पर बातचीत तेज, नवंबर में दिल्ली में होगी अगली बैठक।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण फाइनल हो चुका है। फिलहाल इसके कानूनी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, समझौते को लागू करने से पहले भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसे दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बेहतर या बराबरी का फायदा मिले।
ट्रेड डील पर क्या बोले पीयूष गोयल?
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला चरण तय हो चुका है और अब इसकी अंतिम रूपरेखा और कानूनी ड्राफ्टिंग पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। हालांकि, समझौता तभी लागू किया जाएगा, जब भारत को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में टैरिफ के मामले में बराबरी या बेहतर स्थिति मिलेगी।
गोयल ने यह भी साफ किया कि उनका यह बयान पहले दिए गए बयानों के अनुरूप ही है और इसमें कोई नई बात नहीं है।
जल्द हो सकते हैं ट्रेड डील पर हस्ताक्षर
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
मासिक व्यापार ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
अग्रवाल के मुताबिक, भारत जल्द से जल्द इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद कर रहा है।
टैरिफ और अमेरिकी जांच पर टिकी नजर
हालांकि, ट्रेड डील को अंतिम रूप देने से पहले कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि टैरिफ स्ट्रक्चर को अंतिम रूप देना जरूरी है। इसके अलावा अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 जांच के नतीजों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में केवल बाजार तक पहुंच मिलना ही जरूरी नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर शर्तों पर बाजार तक पहुंच मिलना भी महत्वपूर्ण है।
मैन्युफैक्चरिंग में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर भी चर्चा
भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली उस पहल में भी शामिल हुआ है, जिसका मकसद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता की समस्या से निपटना है।
अग्रवाल के मुताबिक, इस मुद्दे पर G20 में भी चर्चा हुई है। गैर-बाजार आधारित गतिविधियों से पैदा हुई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता वैश्विक व्यापार और बाजारों को प्रभावित कर सकती है।
कनाडा के साथ ट्रेड डील पर भी बातचीत तेज
अमेरिका के अलावा भारत कनाडा के साथ भी व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक दोनों देशों के बीच बातचीत सफलतापूर्वक पूरी हो सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, अगला दौर नवंबर की शुरुआत में दिल्ली में होगा। इससे पहले 5 से 9 अक्टूबर के बीच कनाडा के ओटावा में बातचीत हुई थी।
दोनों देशों के बीच 16 नीतिगत क्षेत्रों पर चर्चा चल रही है। इनमें वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाजार तक पहुंच, व्यापार नियम, कस्टम प्रक्रियाएं और विवाद निपटारा शामिल हैं।
फिलहाल भारत अमेरिका और कनाडा सहित कुल नौ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर बातचीत कर रहा है।

