Gold-Silver Price: सोना-चांदी फिर हुए सस्ते, MOFSL के नवनीत दमानी से जानिए आगे खरीदारी का सही मौका है या नहीं
सोने और चांदी की कीमतों में आज फिर गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट के मुताबिक, बदलते आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की कीमतों और ब्याज दरों की उम्मीदों ने बुलियन बाजार की चाल बदल दी है। जानिए आगे सोना-चांदी में निवेश करना कितना सही रहेगा और क्या है बाजार का नया अनुमान।

In Short
- MCX पर सोना और चांदी दोनों में गिरावट, 10 ग्राम गोल्ड ₹756 और चांदी ₹1,101 तक फिसली।
- मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल, महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीदों ने बुलियन बाजार की चाल बदल दी है।
- अगले 3-5 महीनों में सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को रणनीतिक तरीके से निवेश की सलाह दी गई है।
Gold-Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में आज एक बार फिर से गिरावट देखने को मिल रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सुबह 11:33 बजे तक 5 अगस्त के फ्यूचर ट्रेड वाले 10 ग्राम गोल्ड की कीमत 0.53% या 756 रुपये गिरकर 141501 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
वहीं 4 सितंबर के फ्यूचर ट्रेड वाली चांदी इस समय तक 0.49% या 1101 रुपये गिरकर 222088 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के नवनीत दमानी ने कहा कि बुलियन में हालिया गिरावट कोई असामान्य घटना नहीं, बल्कि बदलते आर्थिक माहौल के हिसाब से बाजार का सामान्य समायोजन है।
दमानी के मुताबिक, निवेशकों ने अब तक यही सीखा कि अनिश्चितता बढ़ने पर सोना सुरक्षित ठिकाना बनता है। लेकिन हाल के महीनों में बाजार ने ठीक उलटा व्यवहार दिखाया। उनका कहना है कि सोना और चांदी पहले ही तीन-चार साल की लंबी और तेज तेजी के दौर से गुजर चुके थे। ऐसे में बड़ी कमाई पर बैठे निवेशकों की मुनाफावसूली ने कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की जमीन तैयार कर दी।
फिलहाल लंबी अवधि का भरोसेमंद दांव नहीं
नवनीत दमानी ने कहा कि आने वाले तीन से पांच महीनों में बुलियन में ऊंची अस्थिरता की आशंका है। उनका मानना है कि अमेरिका में राजनीतिक अनिश्चितता नवंबर तक सोना और चांदी की चाल को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने सलाह दी कि बड़ी गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन हर उछाल को लंबे समय की नई तेजी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक, फिलहाल बुलियन में रणनीतिक ट्रेडिंग के अवसर हैं, लेकिन इसे मजबूत दीर्घकालिक दांव मानने का समय अभी नहीं है।
कच्चे तेल और ब्याज दरों ने बदला खेल
दमानी के अनुसार, इस बार सबसे बड़ा असर बुलियन के बाहर की वजहों से आया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, महंगाई की नई चिंता और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों की रणनीति बदल गई। अब सोना और चांदी सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव पर नहीं, बल्कि ऊर्जा कीमतों, महंगाई की उम्मीदों और मौद्रिक नीति के संयुक्त असर पर कारोबार कर रहे हैं।

