आयुर्वेद की बढ़ती मांग के बीच डाबर का बड़ा दांव! हजारों किसानों के साथ मिलकर कर रही खास खेती
आयुर्वेद और नेचुरल प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग के बीच देश की एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी ने किसानों और दुर्लभ औषधीय पौधों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। इस पहल का मकसद सिर्फ कच्चे माल की उपलब्धता नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटना भी है।

आयुर्वेद और नेचुरल प्रोडक्ट की बढ़ती मांग के बीच डाबर इंडिया ने औषधीय जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक कच्चे माल की आपूर्ति मजबूत करने के लिए किसानों के साथ अपनी पार्टनरशिप का दायरा बढ़ाया है। कंपनी अब देशभर में करीब 15,000 किसानों के साथ काम कर रही है, जो दो साल पहले लगभग 11,000 थी।
डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी 15,000 एकड़ से अधिक भूमि पर दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों और सुगंधित पौधों की खेती करा रही है। उनका कहना है कि यह पहल केवल कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति से लिए गए संसाधनों की भरपाई और संरक्षण पर भी केंद्रित है।
आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग का असर
डाबर का यह कदम ऐसे समय आया है जब आयुर्वेद और नेचुरल प्रोडक्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके चलते औषधीय पौधों और नेचुरल इंग्रेडिएंट्स की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना कंपनियों के लिए रणनीतिक जरूरत बन गया है।
कई दुर्लभ औषधीय प्रजातियों की बड़े पैमाने पर उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी हुई है। इसी वजह से कंपनियां सीधे खेती कार्यक्रमों और किसानों के साथ लॉन्ग टर्म साझेदारी पर जोर दे रही हैं।
नर्सरी नेटवर्क का विस्तार
कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए डाबर ने अपनी नर्सरी व्यवस्था का भी विस्तार किया है। कंपनी उत्तराखंड के पंतनगर और नेपाल में मदर ग्रीनहाउस संचालित करती है। इनके अलावा 26 सैटेलाइट नर्सरी का नेटवर्क भी तैयार किया गया है।
मोहित मल्होत्रा के अनुसार, चुनिंदा गैर-लकड़ी वन उत्पादों और उच्च मूल्य वाली औषधीय प्रजातियों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए कंपनी ने बेहतर क्विलिटी वाले पौधों के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर विशेष ध्यान दिया है।
संकटग्रस्त जड़ी-बूटियों की आपूर्ति पर कंट्रोल
डाबर ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उसने गूगल (Gugal) और एकोनाइट (Aconite) जैसी गंभीर रूप से संकटग्रस्त औषधीय जड़ी-बूटियों की आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह कम करने में सफलता हासिल की है। यह कंपनी की जैव विविधता और सोर्सिंग रणनीति का अहम हिस्सा रहा।

