नारियल बना बड़ा बिजनेस, ₹25 करोड़ से ₹7 हजार करोड़ तक पहुंचा भारत के एक्सपोर्ट का सफर
भारत का नारियल अब सिर्फ घरेलू इस्तेमाल की चीज नहीं रहा, बल्कि बड़ा एक्सपोर्ट कारोबार बन रहा है। 2025-26 में नारियल उत्पादों का निर्यात 62 फीसदी बढ़कर 7,038.35 करोड़ रुपये पहुंच गया। वर्जिन नारियल तेल, नारियल दूध और नारियल पानी जैसे उत्पादों ने भारत के वैश्विक बाजार को मजबूत किया है।

भारत का पारंपरिक नारियल अब सिर्फ घरेलू इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गया है। देश का नारियल उद्योग तेजी से एक्सपोर्ट कारोबार में बदल रहा है। 2025-26 में नारियल उत्पादों का निर्यात बढ़कर 7,038.35 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो 2024-25 के 4,349.03 करोड़ रुपये से 62 फीसदी ज्यादा है। अगर 2001-02 की बात करें तो उस समय नारियल उत्पादों का निर्यात सिर्फ 25.3 करोड़ रुपये था। यह आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कितना बड़ा बदलाव आया है।

भारत अब सिर्फ अपने घरेलू बाजार के लिए नारियल उत्पादन नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया में नारियल उत्पादन में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 31.24 फीसदी है। 2024-25 में देश ने करीब 20,301.22 मिलियन नारियल का उत्पादन किया। यह उत्पादन 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ, जबकि औसत उत्पादकता 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही।

भारत से बाहर जाने वाला नारियल अब सिर्फ वही नहीं है, जो आमतौर पर बाजारों में दिखाई देता है। नारियल उत्पादों की एक्सपोर्ट लिस्ट काफी बड़ी हो गई है। इसमें वर्जिन नारियल तेल, नारियल दूध, नारियल पानी और एक्टिवेटेड कार्बन जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही भारतीय नारियल उत्पादों के बाजार भी बढ़े हैं। अब इनका निर्यात सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों तक पहुंच रहा है।

नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। नए क्षेत्रों में नारियल की खेती शुरू करने वाले किसानों को संबंधित कार्यक्रम के तहत 56,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक की सहायता मिल सकती है। इसके अलावा उत्पादकता बढ़ाने वाली एक अन्य योजना में लाभार्थी और क्षेत्र की सीमा के अनुसार 42,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की 100 फीसदी लागत सब्सिडी का प्रावधान है।

नारियल क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बजट 2026-27 में नई कोकोनट प्रमोशन स्कीम का ऐलान किया गया है। इस योजना का फोकस पुराने हो चुके बागानों, कीट और बीमारियों से जुड़ी समस्याओं, नए पौधों, दोबारा रोपण और प्रोसेसिंग पर है। भारत अब नारियल और कोयर एक्सपोर्ट के क्षेत्र में 2030 के दशक तक वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।
