दिल्ली में खत्म होंगे टोल बैरियर, 9 एंट्री पॉइंट पर शुरू होगी फ्री फ्लो टोलिंग व्यवस्था
दिल्ली में टोल बैरियर हटाने की तैयारी है। MCD अक्टूबर के अंत तक 9 बड़े एंट्री पॉइंट पर मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है। DND फ्लाईवे, राजोकरी, बदरपुर और गाजीपुर जैसे रास्तों पर वाहन बिना रुके गुजर सकेंगे और टोल पेमेंट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होगा।

बिना रुके दिल्ली में एंट्री की तैयारी
दिल्ली में आने वाले लोगों के लिए जल्द ही टोल बैरियर पर रुकने की परेशानी खत्म हो सकती है। MCD अक्टूबर के अंत तक दिल्ली के 9 बड़े एंट्री पॉइंट पर मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है।
इस सिस्टम में गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। टोल पेमेंट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रोसेस होगा और वाहन लगातार चलते रहेंगे।

नौ बड़े एंट्री पॉइंट होंगे शामिल
पहले चरण में दिल्ली के 9 ज्यादा ट्रैफिक वाले एंट्री पॉइंट को शामिल किया गया है। इनमें DND फ्लाईवे, राजोकरी, कुंडली, बदरपुर और गाजीपुर जैसे प्रमुख रास्ते शामिल हैं।
इन रास्तों से रोज बड़ी संख्या में वाहन दिल्ली में प्रवेश करते हैं। ऐसे में टोल लाइन में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।

NHAI की मंजूरी का इंतजार
बैरियर हटाने की योजना में एक बड़ी चुनौती अभी बाकी है। MCD अधिकारियों के मुताबिक, काम शुरू करने से पहले NHAI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC मिलना जरूरी है।
इन 9 जगहों का संयुक्त सर्वे पहले ही किया जा चुका है, लेकिन मंजूरी में देरी से अक्टूबर अंत की समय सीमा पर असर पड़ सकता है।

200 करोड़ रुपये खर्च होंगे
फ्री फ्लो टोलिंग का मतलब टोल खत्म होना नहीं है। इस सिस्टम को लगाने के लिए ठेकेदार Sahakar Global करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
इसमें गैन्ट्री और दूसरी जरूरी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। वहीं MCD को उम्मीद है कि पूरे टोल कॉन्ट्रैक्ट से हर साल करीब 964 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। इस कॉन्ट्रैक्ट में MCD के अधिकार क्षेत्र के सभी 154 टोल प्लाजा शामिल हैं।

गाजीपुर टोल पर सबसे बड़ी चुनौती
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर स्थित गाजीपुर टोल पॉइंट को बदलना सबसे चुनौतीपूर्ण जगहों में से एक माना जा रहा है।
यहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आने वाले वाहनों का भारी दबाव रहता है। अधिकारियों के अनुसार, नए उपकरण लगाने के दौरान ट्रैफिक को प्रभावित न करना एक बड़ी इंजीनियरिंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट चुनौती होगी।
