66 लाख की नौकरी से रिसेप्शनिस्ट तक का सफर, ग्रेस ने बताया क्यों लिया बड़ा फैसला

अच्छी सैलरी और बड़ा पद हर किसी का सपना होता है, लेकिन क्या ये हमेशा खुशी दे सकते हैं? ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस मैक्लीलैंड ने 66 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर कम सैलरी वाली नौकरी चुनी। उनका फैसला दिखाता है कि कई बार पैसे से ज्यादा जरूरी जिंदगी में शांति और अपने लिए समय होता है।

Advertisement
AI generated image

In Short

  • 66 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर ग्रेस ने चुनी कम तनाव वाली जिंदगी
  • बड़े पद के साथ बढ़ते दबाव ने उन्हें नौकरी बदलने का फैसला करने पर मजबूर किया
  • कम कमाई के बावजूद अब ग्रेस के पास खुद के लिए ज्यादा समय है

By Gaurav Kumar:

Work Life Balance: आज के समय में ज्यादातर लोग अच्छी सैलरी और बड़ा पद पाने के लिए मेहनत करते हैं। लेकिन अगर वही नौकरी आपकी खुशी और शांति छीन ले तो क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस मैक्लीलैंड की कहानी इसी बात को दिखाती है। उन्होंने करीब 66 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर रिसेप्शनिस्ट बनने का फैसला किया। इसकी वजह ज्यादा पैसा नहीं, बल्कि बेहतर जिंदगी जीना था।

बड़ा पद मिला लेकिन बढ़ता गया दबाव

ग्रेस ने अपने करियर की शुरुआत रिटेल कंपनी में सेल्स एसोसिएट के तौर पर की थी। अपनी मेहनत से वह एक बड़े ब्रांड के स्टोर की मैनेजर बन गईं।

बाहर से उनका करियर काफी अच्छा दिख रहा था, लेकिन असल में वह काफी परेशान थीं। नई जिम्मेदारियों के साथ उन पर काम का दबाव बढ़ता गया। लंबे समय तक काम करना, रोज सफर करना और हर समय खुद को साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया।

ग्रेस ने बताया कि ऑफिस से घर आने के बाद उनके पास अपनी पसंद का कोई काम करने की ताकत नहीं बचती थी। उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ नौकरी तक सीमित हो गई थी।

लाखों की नौकरी छोड़कर चुना नया रास्ता

लगातार तनाव के बाद ग्रेस ने बिना दूसरी नौकरी तय किए ही अपनी नौकरी छोड़ दी। बाद में उन्होंने एक ऑफिस जॉब की, लेकिन वहां भी उनका मन नहीं लगा।

इसके बाद उन्हें एक बड़ी नौकरी का ऑफर मिला, जिसमें करीब 66 लाख रुपये सालाना सैलरी, बोनस और विदेश यात्रा जैसी सुविधाएं थीं। लेकिन अच्छी कमाई के बावजूद उन्हें खुशी नहीं मिल रही थी।

कम सैलरी में मिली ज्यादा खुशी

आखिरकार ग्रेस ने फैसला किया कि वह सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं करेंगी। उन्होंने रिटेल मैनेजर की नौकरी छोड़कर रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर की नौकरी स्वीकार कर ली।

इससे उनकी कमाई करीब 40 फीसदी कम हो गई, लेकिन उन्होंने इसे खुशी से अपनाया। अब उनके पास अपने लिए समय है। वह अपने शौक पूरे करती हैं, क्रोशिया सीखती हैं और सोशल मीडिया पर कंटेंट भी बनाती हैं।

ग्रेस की कहानी आज कई नौकरी करने वाले लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि सफलता सिर्फ ज्यादा पैसे कमाने में नहीं, बल्कि खुश और शांत रहने में भी है।
 

Read more!
Advertisement