मिडिल ईस्ट में फिर कैसे शुरू हो गई जंग? यूएस-ईरान के बीच सीजफायर का क्या हुआ और अब इजरायल क्यों हमला कर रहा है?
अप्रैल के सीजफायर के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजरायल पर मिसाइल हमला किया है। मिडिल ईस्ट में फिर से युद्ध तब शुरू हुआ जब इजरायल ने 7 जून को बेरूत के दक्षिणी हिस्से में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइलें दागीं।

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से जंग शुरू हो गई है। इस बार ईरान और इजरायल आमने-सामने हैं। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि अचानक ऐसा क्या हुआ जिससे युद्ध दोबारा शुरू हो गया और यूएस-ईरान के बीच सीजफायर का क्या हुआ? चलिए एक-एक कर आसानी से समझे हैं।
फिर से क्यों शुरू हुआ युद्ध?
अप्रैल के सीजफायर के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजरायल पर मिसाइल हमला किया है। मिडिल ईस्ट में फिर से युद्ध तब शुरू हुआ जब इजरायल ने 7 जून को बेरूत के दक्षिणी हिस्से में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर मिसाइलें दागीं।
ईरान द्वारा इजरायली शहरों पर मिसाइल दागने के बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सेना ने ईरान के कई सैन्य अड्डों को अपना निशाना बनाया है।
हिजबुल्लाह पर हमला हुआ तो ईरान ने इजरायल पर क्यों हमला किया?
हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे करीबी क्षेत्रीय सहयोगी (proxy ally) माना जाता है। हिजबुल्लाह को वर्षों से ईरान वित्तीय, सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है। ईरान की सोच साफ है कि हिजबुल्लाह पर हमला मतलब ईरान पर हमला। यही कारण है कि जब इजरायल ने हिजबुल्लाह पर हमला किया तो उसके जवाब में ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दांगी और अब जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने ईरान पर हमला किया है।
सीजफायर का क्या हुआ?
दरअसल जो सीजफायर यूएसए और ईरान के बीच था उसमें ईरान ने यह भी शर्तें रखी थी अगर हिजबुल्लाह पर हमला होगा तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। अब जबकी इजरायल ने हिजबुल्लाह पर हमला कर दिया है तो उसी की जवाबी कार्रवाई में यह युद्ध शुरू हुआ है।
नेतन्याहू ने ठुकराई ट्रंप की सलाह
इस ताजा हमले ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं। घटनाक्रम से ठीक पहले ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर बात की थी और उन्हें किसी भी तरह का जवाबी हमला न करने की सलाह दी थी। ट्रंप का तर्क था कि ईरानी हमलों से किसी को खास नुकसान नहीं पहुंचा है, इसलिए इजरायल को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि यदि नेतन्याहू ने हमला जारी रखा, तो यह अंतहीन सिलसिला दशकों पुराना होने के बावजूद और लंबा खिंच जाएगा।
हालांकि, ट्रंप की हिदायत का नेतन्याहू पर कोई असर होता नहीं दिखा और इजरायल ने ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। फिलहाल इजरायल ने पूरे देश में स्कूलों को बंद कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि यह सैन्य कार्रवाई लंबी चल सकती है।
शांति समझौते पर लटकी तलवार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप काफी समय से ईरान के साथ एक अंतिम समझौते की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने दावा किया था कि वे इस समझौते के बेहद करीब हैं और उम्मीद जताई थी कि आने वाले दिनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। लेकिन, अब इजरायल की कार्रवाई से यह कूटनीतिक कोशिशें पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। ट्रंप पहले ही लेबनान पर इजरायल के हमलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और उन्होंने ईरान से भी मिसाइलें दागने के बाद शांति की अपील की थी।
जमीनी हकीकत क्या है?
इजरायल की सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर अपने हमले की जिम्मेदारी ली है। दूसरी ओर, ईरानी समाचार एजेंसी IRNA ने तेहरान, इस्फहान और तब्रीज में धमाकों की पुष्टि की है। हालांकि, ईरान के शहरी मंत्रालय ने किसी भी नागरिक इलाके को नुकसान पहुंचने या आग लगने की खबरों को खारिज किया है। फिलहाल अमेरिकी सेना पूरी तरह अलर्ट पर है, लेकिन इजरायल के इस कदम ने इस क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।