दिल्ली-एनसीआर में मानसून की विदाई के बाद भी क्यों हो रही मूसलाधार बारिश? IMD ने बताई मौसम बदलने की असली वजह

दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह अचानक हुई तेज बारिश ने लोगों को हैरान कर दिया। मानसून की विदाई के बावजूद राजधानी और आसपास के इलाकों में बादल जमकर बरसे। सफदरजंग में सुबह तक 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। आखिर अक्टूबर में इतनी तेज बारिश क्यों हुई? सैटेलाइट तस्वीरों में क्या सामने आया और पश्चिमी विक्षोभ का इसमें क्या रोल है? जानिए मौसम विभाग का पूरा विश्लेषण।

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मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में तेज बारिश पश्चिम से आए मौसमी बदलाव के कारण हुई।
मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में तेज बारिश पश्चिम से आए मौसमी बदलाव के कारण हुई।

In Short

  • दिल्ली-एनसीआर में तेज बारिश, सफदरजंग में 40 MM वर्षा दर्ज।
  • पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली और आसपास के इलाकों में बारिश।
  • मानसून की विदाई के बाद भी तेज बारिश की संभावना बनी रहती है।

By Shakshi:

दिल्ली-एनसीआर में सोमवार सुबह तेज बारिश और गरज-चमक ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। रविवार देर रात से ही तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई थी, जिसने सोमवार सुबह तक दिल्ली और आसपास के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में भी तेज बारिश देखने को मिली।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इस अचानक बदले मौसम के पीछे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की अहम भूमिका है। खास बात यह है कि कई इलाकों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद भारी बारिश हो रही है।

दिल्ली के प्रमुख मौसम केंद्र सफदरजंग में सोमवार सुबह 5:30 बजे तक 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की थी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून की विदाई के बाद भी कुछ मौसमी सिस्टम सक्रिय रह सकते हैं, जो अचानक तेज बारिश और आंधी का कारण बनते हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखाई दिया?

सोमवार सुबह 8:30 बजे से 8:57 बजे के बीच ली गई INSAT-3DS सैटेलाइट की थर्मल इंफ्रारेड तस्वीरों में उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर घने बादल दिखाई दिए। हिमालयी क्षेत्रों से लेकर आसपास के मैदानी इलाकों तक बादलों की एक लंबी पट्टी फैली हुई नजर आई। इन बादलों का असर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिला।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देने वाले चमकीले सफेद हिस्से आमतौर पर बादलों के ऊपरी हिस्से का तापमान कम होने का संकेत देते हैं। ऐसे बादल ऊंचे और घने हो सकते हैं, जिनसे गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना रहती है। हालांकि, सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर किसी खास इलाके में बारिश की तीव्रता का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

पश्चिमी विक्षोभ कैसे बना तेज बारिश की वजह?

मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में अचानक हुई तेज बारिश की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है। यह एक मौसमी सिस्टम होता है, जो पश्चिम दिशा से पूर्व की ओर बढ़ता है और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश, आंधी और कभी-कभी ओलावृष्टि का कारण बनता है। IMD के 11 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय था।

इसके अलावा उत्तर-पश्चिम राजस्थान से उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश तक एक वायुमंडलीय ट्रफ फैली हुई थी। एक अन्य ट्रफ मध्य पाकिस्तान के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण को उत्तरी मध्य प्रदेश से जोड़ रही थी। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण हवा ऊपर उठती है और पर्याप्त नमी मिलने पर घने बादल बनने लगते हैं। यही वजह है कि हरियाणा से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक बारिश वाले बादलों का विस्तार हुआ।

क्या दिल्ली-एनसीआर में आगे भी होगी बारिश?

मौसम विभाग ने सोमवार सुबह दिल्ली में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की थी। वहीं, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आसपास के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया। मध्य हरियाणा से आगे बढ़ रहे बादलों के कारण दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के अलग-अलग इलाकों में रुक-रुककर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

तेज बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, ट्रैफिक जाम और विजिबिलिटी कम होने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को यात्रा के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। हालांकि, इस बारिश को मानसून की वापसी नहीं माना जाना चाहिए।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून के लौट जाने के बाद भी पश्चिमी विक्षोभ जैसे मौसमी सिस्टम सक्रिय हो सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर में मौजूदा बारिश भी इसी तरह की मानसून के बाद की मौसमी गतिविधियों का नतीजा है।

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