स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किसका कंट्रोल? अमेरिका के दावे के बीच ईरान ने भी दिखाई ताकत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। दोनों देश इस अहम समुद्री रास्ते पर अपना कंट्रोल होने का दावा कर रहे हैं। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस ट्रांसपोर्ट वाले इस रूट पर बढ़ता तनाव ग्लोबल सप्लाई और सिक्योरिटी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

In Short
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका ने "टोटल कंट्रोल" का दावा किया, ईरान ने इसे अपना मैनेजमेंट एरिया बताया।
- ईरान की मिलिट्री कमांड ने कहा- तेहरान की अनुमति के बिना कोई जहाज नहीं गुजर सकता।
- दुनिया के करीब 20% तेल और LNG सप्लाई वाले इस रास्ते पर जंग के बाद बढ़ा तनाव।
पश्चिम एशिया की जंग में अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से का तेल और लिक्विड नेचुरल गैस भेजी जाती है। अब सवाल यह है कि इस रणनीतिक रास्ते का असली कंट्रोल किसके पास है। इसका जवाब अमेरिका और ईरान अपने-अपने तरीके से दे रहे हैं।यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के दावे आमने-सामने आ गए हैं।
ईरान का दावा- बिना तेहरान की इजाजत नहीं गुजर सकता कोई जहाज
ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज उसके मैनेजमेंट और कंट्रोल में है। ईरान की बसीज पैरामिलिट्री यूनिट के प्रमुख होसैन ताएब ने कहा कि इस रास्ते की पूरी सिक्योरिटी इस्लामिक रिपब्लिक संभाल रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करने के लिए संघर्ष शुरू किया, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हुआ।
ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने भी कहा कि कोई भी जहाज तेहरान की अनुमति के बिना स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ईरान ने सामान्य शिपिंग जारी होने के अमेरिकी दावे को झूठ और गलत जानकारी बताया।
अमेरिका बोला- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हमारा पूरा कंट्रोल
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेवी का ब्लॉकेड "स्टील की दीवार" जैसा है और ईरान इसे रोक नहीं सकता।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास न नेवी बची है, न एयर फोर्स, न पैसा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को कमजोर बताते हुए कहा कि रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स भी काफी नुकसान झेल चुका है।
जंग के बाद बंद हुआ था ये अहम समुद्री रास्ता
यह तनाव उस जंग के बाद बढ़ा जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुई थी। इसके बाद ईरान ने प्रभावी रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था।
जंग से पहले इस रास्ते से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और लिक्विड नेचुरल गैस की सप्लाई होती थी। अमेरिका ने ईरान की शिपिंग और पोर्ट्स पर नेवल ब्लॉकेड लगाया, जबकि उसने गैर-ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले जहाजों की फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की सुरक्षा का दावा किया।
सीजफायर समझौता टूटा, फिर बढ़ा तनाव
जून में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इसमें स्थायी सीजफायर और गल्फ में शिपिंग को फिर से सामान्य करने की बात कही गई थी। लेकिन कुछ हफ्तों बाद यह समझौता टूट गया और दोनों देशों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए।
इसके बाद ईरान ने उन जहाजों पर सीमित हमले फिर शुरू किए जिन्हें वह समझौते का उल्लंघन करने वाला बता रहा था। वहीं अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी इलाकों पर दोबारा हमले शुरू किए ताकि गल्फ में जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता कम की जा सके।
ईरान की शर्त- वादे पूरे होने तक नहीं खुलेगा रास्ता
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अगर तेहरान की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो ईरान की रणनीति ऑफेंसिव वॉर की होगी।
उन्होंने होर्मुज इकोनॉमिक-सिक्योरिटी मैकेनिज्म का भी जिक्र किया, जो ईरान और ओमान के संभावित समझौते से जुड़ा है। ईरानी सैन्य और राजनीतिक अधिकारी रसूल सनाई-रद ने कहा कि ईरान तब तक यह रास्ता नहीं खोलेगा, जब तक दूसरा पक्ष अंतरिम समझौते की शर्तें पूरी नहीं करता। उन्होंने कहा कि अमेरिका अकेले दम पर स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोल सकता।