अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म होने के बाद बढ़ा तनाव; ईरान ने होर्मुज बंद रखा, ट्रंप बोले कोई बातचीत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर खत्म होने के बाद तनाव फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने बातचीत से इनकार किया है, जबकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखने की बात कही है। इस टकराव का असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और दुनिया के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है।

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In Short

  • ट्रंप ने कहा ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है, जबकि कुशनर ने बातचीत जारी रहने की बात कही थी।
  • ईरान ने अमेरिका की शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रखने का ऐलान किया।
  • संघर्ष का असर तेल कीमतों, वैश्विक बाजार और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर बढ़ता जा रहा है।

By Gaurav Kumar:

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम खत्म हो चुका है। इसके बाद बातचीत को लेकर दोनों तरफ से अलग अलग बयान सामने आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है, जबकि ईरान ने अपनी शर्तें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की बात कही है। इस पूरे मामले का असर खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और दुनिया के ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

ट्रंप ने कहा ईरान से कोई बातचीत नहीं हो रही

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही इसकी कोई योजना है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत या चर्चा नहीं हो रही है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी है और सभी पानी के नीचे मौजूद विस्फोटक उपकरणों को हटा दिया गया है या नष्ट कर दिया गया है।

हालांकि ट्रंप का यह बयान उनके ही दामाद और विशेष दूत जारेड कुशनर के बयान से अलग था। कुशनर ने एक दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और यह पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है।

होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे अलग

सीजफायर खत्म होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद बढ़ गए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि यह रणनीतिक समुद्री रास्ता खुला हुआ है और सामान्य रूप से काम कर रहा है।

वहीं ईरान ने कहा है कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका उसकी शर्तें पूरी नहीं करता। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करनी होगी, तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने होंगे, जब्त की गई ईरानी संपत्तियां वापस करनी होंगी और सैन्य कार्रवाई व धमकियां रोकनी होंगी।

60 दिन की बातचीत का समय हुआ खत्म

17 जून को हुए समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत को लेकर बड़ी बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। यह समय सोमवार को खत्म हो गया।

इसके बाद दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पाई है। इस अनिश्चितता का असर बाजारों पर भी पड़ा है। तेल की कीमतों में तेजी आई, शेयर बाजार कमजोर हुए और अमेरिका समेत कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज लेने की लागत कई सालों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

यूएई में बढ़ा तनाव मिसाइल और जहाज पर हमला

इस बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात ने बताया कि उसने दो ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये मिसाइलें समुद्री यातायात को निशाना बना रही थीं, लेकिन दोनों समुद्र में गिर गईं।

हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने यूएई के इस दावे को बेबुनियाद बताया।

यूएई ने इसके बाद ईरान के साथ सभी व्यापार, कारोबारी लेनदेन और वित्तीय गतिविधियों को अगले आदेश तक रोकने का फैसला किया। इसी दौरान ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन विभाग ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज को अज्ञात हथियार से नुकसान पहुंचा। इस घटना में एक चालक दल का सदस्य घायल हुआ।

ईरान ने कहा बातचीत के लिए तैयार लेकिन झुकेगा नहीं

तनाव बढ़ने के बावजूद ईरान ने कहा है कि वह बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसे आत्मसमर्पण की तरह नहीं देखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सैन्य दबाव और प्रतिबंधों से ईरान का रुख नहीं बदलेगा। ईरान अपनी सुरक्षा, सम्मान और सहयोगियों की रक्षा करेगा, लेकिन वह युद्ध नहीं चाहता।

हालांकि ईरान के सामने घरेलू दबाव भी बढ़ रहा है। अधिकारियों को चिंता है कि लंबे समय तक आर्थिक परेशानी रहने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं और देश में असंतोष बढ़ सकता है।

संघर्ष का असर दुनिया के बाजारों पर

करीब छह महीने से चल रहे इस संघर्ष का बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। युद्ध के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो युद्ध से पहले के स्तर से करीब 75 प्रतिशत ज्यादा थी।

मंगलवार को यह कीमत 20 सेंट बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुई।

अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन के पास अभी भी कई ऐसे कदम हैं जिनका इस्तेमाल आने वाले समय में किया जा सकता है।

इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर ईरान और लेबनान के लोग शामिल हैं। ईरानी सेना ने ओमान, जॉर्डन, कुवैत, इजरायल, यूएई और सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।

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