UPI MDR को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई, जानिए नए नियम में क्या बदलेगा
UPI MDR को लेकर उठे विवाद के बीच सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट मुफ्त रहेगा, जबकि 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही नया MDR लागू होगा।

In Short
- UPI MDR पर सरकार ने कहा- फैसला विदेशी दबाव में नहीं लिया गया।
- 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लगेगा।
- ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने को लेकर उठे सवालों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि UPI से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है और यह फैसला किसी भी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समावेशी और किफायती बनाना है। सरकार ने यह भी साफ किया कि आम ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि दोस्तों और परिवार को पैसे भेजने, दुकानों पर भुगतान करने या QR कोड स्कैन कर पेमेंट करने पर ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक, पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर हमेशा मुफ्त रहेंगे, चाहे ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ बड़े मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR लागू होगा। इसमें 0.4 फीसदी MDR तय किया गया है। इसका भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि कारोबारी करेगा। हर ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।
छोटे कारोबारियों को राहत
सरकार के अनुसार, हर महीने UPI QR के जरिए 1 लाख रुपये तक कमाने वाले छोटे कारोबारियों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, 2,000 रुपये से कम के मर्चेंट भुगतान भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि 95 फीसदी से ज्यादा मर्चेंट पेमेंट 2,000 रुपये से कम के होते हैं, इसलिए ज्यादातर लेनदेन पर नई MDR व्यवस्था का असर नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बिल भुगतान और बीमा जैसी जरूरी सेवाओं में 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 5 रुपये का तय शुल्क होगा। वहीं, म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज से जुड़े भुगतान पर MDR 0.02 फीसदी होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
ग्राहकों से MDR वसूलने पर रोक
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कारोबारियों से MDR की लागत ग्राहकों से न वसूलने को कहें। साथ ही UPI ऐप्स को किसी भी तरह का अतिरिक्त प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार के मुताबिक, 2016 में शुरू हुआ UPI अब दुनिया की सबसे बड़ी रियल टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट व्यवस्था बन चुका है। अगस्त 2026 में ही UPI पर 24.5 अरब लेनदेन हुए।
मंत्रालय ने कहा कि बड़े मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में किया जाएगा। इसके अलावा छोटे कारोबारियों को UPI से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
इस फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। पार्टी ने आरोप लगाया था कि MDR लागू करने से अमेरिकी कार्ड कंपनियों को UPI के मुकाबले फायदा मिल सकता है।
राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सवाल किया था कि MDR की दर 0.4 फीसदी ही क्यों तय की गई और क्या इसका संबंध डेबिट कार्ड पर लागू MDR से है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी मांग के आगे झुककर UPI पर शून्य MDR की व्यवस्था खत्म करने का फैसला किया है।
जयराम रमेश ने अपने दावे के समर्थन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ओर से पहले UPI के मुफ्त होने को लेकर की गई आलोचना का भी हवाला दिया था।