UPI MDR से पहले समझें P2M का गणित! ₹29.82 लाख करोड़ के पेमेंट में ₹2,000+ ट्रांजैक्शन का कितना दबदबा?

UPI पर MDR नियम लागू होने की तैयारी के बीच अगस्त 2026 के आंकड़े डिजिटल पेमेंट की एक बड़ी तस्वीर दिखाते हैं। NPCI डेटा के मुताबिक P2M यानी मर्चेंट पेमेंट्स में ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन ने वैल्यू के लिहाज से 67% हिस्सेदारी हासिल की। जानिए UPI पेमेंट्स का पूरा गणित और बड़े ट्रांजैक्शन क्यों हैं अहम।

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NPCI डेटा ने खोला राज: बड़े UPI पेमेंट्स में कितना पैसा जा रहा?
NPCI डेटा ने खोला राज: बड़े UPI पेमेंट्स में कितना पैसा जा रहा?

In Short

  • अगस्त 2026 में UPI की कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही
  • P2M पेमेंट्स में ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन का वैल्यू शेयर 67% रहा
  • MDR नियमों के बीच बड़े मर्चेंट पेमेंट्स पर नजर, छोटे पेमेंट्स की हिस्सेदारी भी अहम

By Shakshi:

UPI पर नए Merchant Discount Rate यानी MDR नियम लागू होने की तैयारी के बीच अब नजर उन ट्रांजैक्शन पर है, जिन पर इसका असर पड़ सकता है। NPCI (National Payments Corporation of India) के अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि Person to Merchant यानी P2M UPI पेमेंट्स में ₹2,000 से ऊपर की ट्रांजैक्शन वैल्यू के लिहाज से सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

अगस्त में UPI से हुआ ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन

NPCI के मुताबिक, अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल ₹29,82,355.95 करोड़ यानी करीब ₹29.82 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ। इसमें P2M पेमेंट्स यानी ग्राहकों द्वारा दुकानदारों और कारोबारियों को किए गए भुगतान की हिस्सेदारी वैल्यू के हिसाब से करीब 30% रही।

अगस्त 2026 में P2M पेमेंट्स की कुल वैल्यू करीब ₹8.95 लाख करोड़ रही। इसमें ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट्स का हिस्सा करीब 67% रहा। यानी मर्चेंट को किए गए हर 100 रुपये के UPI भुगतान में करीब 67 रुपये ऐसे ट्रांजैक्शन से आए जिनकी वैल्यू ₹2,000 से ज्यादा थी।

हालांकि, ट्रांजैक्शन की संख्या यानी वॉल्यूम में तस्वीर अलग है। ₹2,000 से ऊपर के P2M पेमेंट्स अगस्त में कुल P2M ट्रांजैक्शन का सिर्फ करीब 4% रहे। इसका मतलब है कि संख्या में छोटे भुगतान ज्यादा हैं, लेकिन बड़े भुगतान कुल रकम का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।

MDR नियमों में क्यों अहम है ₹2,000 की सीमा?

नए MDR फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। वहीं P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांजैक्शन और ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट्स पर MDR लागू नहीं होगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा और इसका असर पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर रहेगा।

UPI में छोटे पेमेंट्स की हिस्सेदारी ज्यादा

हालांकि ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट्स वैल्यू में आगे हैं, लेकिन UPI का इस्तेमाल रोजमर्रा के छोटे खर्चों के लिए भी बड़े पैमाने पर होता है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, P2M पेमेंट्स में ₹500 तक के ट्रांजैक्शन की हिस्सेदारी करीब 16% वैल्यू रही, जबकि ₹501 से ₹2,000 वाले पेमेंट्स का हिस्सा करीब 17% रहा।

बड़े पेमेंट्स पर फोकस क्यों?

UPI की शुरुआत छोटे डिजिटल पेमेंट्स को आसान बनाने के लिए हुई थी, लेकिन अब इसका इस्तेमाल बड़े मर्चेंट भुगतान में भी तेजी से बढ़ा है। MDR नियमों का फोकस इसी बड़े वैल्यू वाले P2M सेगमेंट पर है, जबकि छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के भुगतान को राहत दी गई है।

अगस्त 2026 के आंकड़े दिखाते हैं कि ₹2,000 से ऊपर के UPI मर्चें पेमेंट्स संख्या में भले कम हैं, लेकिन डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की कुल वैल्यू में इनकी भूमिका काफी बड़ी है।

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