UPI के नए चार्ज पर बढ़ा विवाद, मनीष तिवारी बोले- समिति के सामने नहीं आया था मौजूदा प्रस्ताव
UPI पर MDR लगाने को लेकर नया सियासी विवाद शुरू हो गया है। संसदीय वित्त समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने रिपोर्ट सर्वसम्मति से पेश होने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विपक्ष के समर्थन के दावे को खारिज किया है। जानिए पूरा मामला।

In Short
- UPI पर MDR को लेकर भर्तृहरि महताब और मनीष तिवारी के बीच विवाद
- महताब ने कहा कि संसदीय समिति की रिपोर्ट सर्वसम्मति से पेश हुई थी
- तिवारी का दावा कि मौजूदा MDR प्रस्ताव समिति के सामने नहीं आया था
UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। संसदीय वित्त समिति के अध्यक्ष और BJP सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट सभी सदस्यों की सहमति से संसद में पेश की गई थी। वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विपक्षी सदस्यों की ओर से MDR प्रस्ताव का समर्थन किए जाने के दावे को गलत बताया है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब UPI से चुनिंदा व्यापारिक लेनदेन पर MDR लगाने का नया नियम 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है।
भर्तृहरि महताब ने क्या कहा?
ANI के मुताबिक, भर्तृहरि महताब ने शुक्रवार को कहा कि संसदीय समिति में किसी भी रिपोर्ट को तैयार करने और मंजूरी देने की एक तय प्रक्रिया होती है।
उन्होंने बताया कि वित्तीय सेवाओं के विभाग को सवाल भेजे गए थे। विभाग से लिखित जवाब मिलने के बाद रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार किया गया और समिति के सदस्यों के बीच बांटा गया।
इसके बाद चर्चा हुई और रिपोर्ट को मंजूरी देकर संसद में पेश किया गया।
महताब के मुताबिक, यह रिपोर्ट सर्वसम्मति से पेश की गई थी और इससे जुड़ी पूरी जानकारी रिकॉर्ड में मौजूद है।
मनीष तिवारी ने क्यों उठाए सवाल?
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विपक्षी सदस्यों की ओर से MDR प्रस्ताव का समर्थन किए जाने के दावे को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि 12 मार्च 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों की जांच के दौरान समिति ने सरकार से केवल एक संभावित रेवेन्यू मॉडल तलाशने की सिफारिश की थी।
तिवारी के मुताबिक, समिति ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित तीन साल की योजना और कैशबैक की जरूरत बताई थी। साथ ही वित्तीय सेवाओं के विभाग को ऐसा रेवेन्यू मॉडल तलाशने को कहा था, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम लंबे समय तक अपने खर्च खुद उठा सके।
उन्होंने जोर दिया कि समिति ने केवल संभावनाएं तलाशने की बात कही थी, MDR लागू करने की मंजूरी नहीं दी थी।
सरकार के जवाब का भी किया जिक्र
मनीष तिवारी ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट में सरकार के जवाब का भी जिक्र किया।
इसके मुताबिक, सरकार UPI सिस्टम को लंबे समय तक चलाने और सरकारी खर्च कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार कर रही थी।
पहला विकल्प चुनिंदा बड़े लेनदेन और व्यापारियों पर MDR दोबारा लगाने की संभावना की जांच करना था। दूसरा विकल्प अलग-अलग स्तर पर प्रोत्साहन देने की व्यवस्था बनाना था, जिससे आने वाले वर्षों में सरकारी सहायता धीरे-धीरे कम की जा सके।
तिवारी ने कहा कि इसके बाद UPI और दूसरे डिजिटल पेमेंट पर ट्रांजैक्शन फीस या MDR लगाने का मौजूदा प्रस्ताव समिति के सामने नहीं आया था।
उनके मुताबिक, केवल असहमति दर्ज नहीं कराने के आधार पर यह कहना गलत है कि विपक्षी सदस्यों ने MDR लगाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था।
UPI पर MDR का नया नियम क्या है?
15 सितंबर को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने नया MDR फ्रेमवर्क पेश किया था। इसके तहत 15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारिक UPI लेनदेन पर MDR लागू होगा।
₹2,000 से ज्यादा के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन पर 0.4% MDR लगेगा। हालांकि, एक ट्रांजैक्शन पर अधिकतम MDR ₹300 होगा।
MDR पेमेंट प्रोसेसिंग से जुड़ा शुल्क है, जो व्यापारी से लिया जाता है। आम ग्राहकों के लिए UPI से भुगतान मुफ्त बना रहेगा।