केरल नहीं अब 'केरलम' बोलिए! नाम बदलने के लिए कैबिनेट की मिली मंजूरी, इस वजह से हुआ बदलाव
यह फैसला केरल विधानसभा द्वारा जून 2024 में पारित उस प्रस्ताव के बाद लिया गया है, जिसमें राज्य के ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए नाम बदलने की मांग की गई थी। सरकार का मानना है कि 'केरलम' नाम राज्य की स्थानीय भाषा और परंपरा के अधिक अनुरूप है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में केरल राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
यह फैसला केरल विधानसभा द्वारा जून 2024 में पारित उस प्रस्ताव के बाद लिया गया है, जिसमें राज्य के ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से दर्शाने के लिए नाम बदलने की मांग की गई थी। सरकार का मानना है कि 'केरलम' नाम राज्य की स्थानीय भाषा और परंपरा के अधिक अनुरूप है।
केरल की सरकार ने 2024 में ही केरल का नाम बदलकर केरलम करने का प्रस्ताव राज्य की विधानसभा में लाया था। सरकार के मुताबिक, केरलम नाम मलयालम भाषा से जुड़ा है। इसके अलावा स्थानीय लोग व मूल भाषा में राज्य को केरलम ही कहते हैं। इसी को देखते हुए राज्य सरकार चाहती है कि संविधान के आर्टिकल 3 के तहत केरल का नाम बदला जाए।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के मुताबिक, मलयाली बोलने वालों के बीच हमेशा से ही एक अलग राज्य होने की मांग रही है।केरल की विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि संविधान की आठवीं अनुसूची की भाषाओं में केरल का नाम बदलकर केरलम किया जाए।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब आगे क्या?
अब जब कैबिनेट ने केरल के नाम बदलने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, इसके बाद भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक नया बिल 'Kerala Alteration of Name Bill 2026' को केरल की राज्य विधानसभा के पास भेजेंगी। केरल की सरकार इस बिल पर अपनी राय रखने के बाद इसे वापस भारत सरकार के पास भेज देगी।
केरल की राज्य सरकार के विचार को ध्यान में रखते हुए इस बिल और उसमें किए गए सुधारों के साथ भारत सरकार यह बिल राष्ट्रपति के पास उनके सहमति के लिए भेजेगी। राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद ही सरकार केरल के नाम बदलने वाले इस प्रस्ताव को संसद में पेश करेगी।