प्राइवेट हो या सरकारी सब पर एक्शन! बॉम्बे HC कैंटीन रेड को लेकर तुकाराम मुंडे ने खोला राज
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बॉम्बे हाई कोर्ट कैंटीन जांच को लेकर कई अहम बातें बताईं। आखिर ऐसी कौन सी वजह थी जिसके बाद FDA की टीम को वहां पहुंचना पड़ा और जांच में क्या सामने आया? पूरी कहानी जानिए इस रिपोर्ट में, जहां मुंडे ने कार्रवाई के पीछे की वजह बताई।

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन में हुई जांच को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि FDA की कार्रवाई सिर्फ निजी संस्थानों तक सीमित नहीं है बल्कि सरकारी और सेमी सरकारी जगहों पर भी फूड सेफ्टी नियमों की जांच की जा रही है। इसी सिलसिले में हाई कोर्ट कैंटीन की जांच की गई जहां कई खामियां सामने आईं।
कोर्ट में उठे सवाल के बाद हुई हाई कोर्ट कैंटीन की जांच
Business Today's India @100 कार्यक्रम में इंडिया टुडे की प्रीति चौधरी से बातचीत के दौरान तुकाराम मुंडे ने बताया कि हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा था कि क्या FDA सिर्फ प्राइवेट जगहों पर ही कार्रवाई कर रहा है या सरकारी और सेमी सरकारी संस्थानों पर भी नजर रखी जा रही है।
मुंडे ने बताया कि वह खुद उस सुनवाई में मौजूद नहीं थे लेकिन FDA अधिकारियों और सरकार की तरफ से मौजूद प्रतिनिधि ने उन्हें कोर्ट में हुई चर्चा की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट कैंटीन की जांच कराने का फैसला लिया।
तीन कैंटीन में से दो के पास नहीं था लाइसेंस
तुकाराम मुंडे ने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट में कुल तीन कैंटीन थीं। जांच के दौरान सामने आया कि इनमें से दो कैंटीन जरूरी लाइसेंस के बिना चल रही थीं।
उन्होंने कहा कि FDA का काम फूड सेफ्टी नियमों को लागू करना है और इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। चाहे कोई जगह प्राइवेट हो या सरकारी सभी को तय नियमों का पालन करना जरूरी है।
मन मंत्रालय कैंटीन की पहले हो चुकी थी जांच
मुंडे ने बताया कि कोर्ट में जब यह सवाल पूछा गया कि क्या FDA ने मन मंत्रालय की कैंटीन की जांच की है तो उन्होंने बताया कि वहां पहले ही जांच की जा चुकी थी।
इसके बाद उनसे पूछा गया कि क्या बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई है। उस समय उनका जवाब था कि अभी तक वहां जांच नहीं हुई है। इसके बाद कोर्ट की तरफ से हाई कोर्ट कैंटीन की जांच करने की बात कही गई और अगले ही दिन FDA की टीम ने वहां पहुंचकर कार्रवाई की।
खुद को चुनौती देते हैं किसी और को नहीं
इंटरव्यू के दौरान तुकाराम मुंडे से उनके काम करने के तरीके को लेकर भी सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि कुछ लोग उन्हें अरोगेंट यानी घमंडी क्यों मानते हैं और क्या छोटी गलतियों पर ज्यादा सख्त कार्रवाई की जाती है।
इस पर मुंडे ने कहा कि वह किसी और को चुनौती नहीं देते बल्कि खुद को चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा कि उनका फोकस नियमों को लागू करने और अपनी जिम्मेदारी निभाने पर रहता है।
फूड सेफ्टी नियमों पर सख्ती जारी रखने का संकेत
तुकाराम मुंडे ने साफ किया कि FDA की कार्रवाई किसी खास संस्था को निशाना बनाने के लिए नहीं थी। उनका कहना है कि फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए बराबर हैं और हर जगह उनकी जांच होनी चाहिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट कैंटीन की जांच भी इसी सोच का हिस्सा थी ताकि यह संदेश दिया जा सके कि नियमों का पालन सरकारी और निजी दोनों संस्थानों में जरूरी है।