ट्रंप–ईरान समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट और तेल प्रतिबंधों पर वैश्विक असर देखने को मिलेगा?
डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने आपसी टकराव खत्म करने के लिए एक एमओयू पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट, तेल पाबंदियों और 60 दिनों की शर्तों को लेकर आगे बातचीत का रास्ता खुल गया है।

In Short
- ट्रंप-ईरान MoU से संघर्ष खत्म, निवेश और तेल पर बड़ी सहमति?
- क्या ट्रंप और ईरान की डील से खाड़ी में नया दौर शुरू होगा?
- ईट्रंप और पेजेश्कियन की डील से तेल बाजार पर क्या असर?
- ट्रंप-ईरान MoU पर हुए डिजिटल सिग्नेचर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करना है। यह समझौता डिजिटल रूप से बुधवार को साइन हुआ। इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से इसे मंजूरी दी थी। यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू हो गया।
इस घटनाक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में पेरिस के वर्साय पैलेस में डोनाल्ड ट्रंप ने MoU की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस ने भी साइनिंग का वीडियो जारी किया है, जिससे इसकी आधिकारिक कर दिया गया है।
डिजिटल सिग्नेचर और 60 दिन का रोडमैप
MoU के मुताबिक यह समझौता लगभग चार महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। दोनों देशों ने 60 दिनों की एक फ्रेमवर्क अवधि तय की है, जिसमें किसी भी पक्ष को समझौते को कमजोर करने वाली कार्रवाई से बचना होगा। इस दौरान नए प्रतिबंध लगाने और सैन्य तैनाती बढ़ाने से भी परहेज करने की सहमति बनी है।
ईरान ने साफ किया है कि उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे और उसे बिना बाधा तेल बेचने की अनुमति मिलेगी। समझौते में करीब 300 अरब डॉलर के निवेश का प्रावधान भी शामिल बताया गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्षेत्रीय असर पर फोकस
इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, जो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। ईरान ने कहा है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संचालन जारी रहेगा। ईरान ने यह भी साफ किया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कुछ समय तक जारी रहेगी।