अमेरिका में पढ़ाई के साथ नौकरी का सपना होगा महंगा? देने पड़ सकते हैं 70 हजार डॉलर की फीस
अमेरिका में पढ़ाई के साथ नौकरी करने वाले विदेशी छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने OPT कार्यक्रम पर भारी फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। इससे कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और कंपनियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, नियम अभी लागू नहीं हुआ है। जानें क्या है पूरा मामला।

In Short
- ट्रंप प्रशासन ने OPT के शुरुआती आवेदन पर ₹67.72 लाख फीस लगाने का प्रस्ताव दिया।
- OPT रिन्यू कराने पर 30,000 डॉलर फीस का प्रस्ताव, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को करना होगा भुगतान।
- नए नियम पर 60 दिन तक मांगी जाएगी राय, फिलहाल लागू नहीं हुआ है फैसला।
अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों के लिए अब नौकरी करना महंगा पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम पर भारी फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत हर नए छात्र के शुरुआती आवेदन पर 70,000 डॉलर यानी करीब ₹67.72 लाख की फीस लग सकती है। हालांकि, यह रकम छात्रों से सीधे नहीं, बल्कि संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ली जाएगी।
क्या है OPT कार्यक्रम?
OPT एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसके जरिए विदेशी छात्र अमेरिका में अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में काम कर सकते हैं। आमतौर पर ग्रेजुएशन के बाद छात्रों को एक साल तक काम करने का मौका मिलता है।
वहीं, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM विषयों के छात्रों को दो साल अतिरिक्त काम करने की अनुमति मिल सकती है।
कितनी फीस लगाने का प्रस्ताव?
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने OPT के शुरुआती आवेदन पर 70,000 डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है।
इसके अलावा कार्यक्रम को आगे बढ़ाने या रिन्यू कराने के लिए 30,000 डॉलर की फीस प्रस्तावित है। यह रकम संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी को चुकानी होगी।
कॉलेज और कंपनियों पर क्या होगा असर?
इस प्रस्ताव का असर अमेरिकी कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर पड़ सकता है। इन संस्थानों में बड़ी संख्या में विदेशी छात्र पढ़ते हैं और उनकी फीस से कॉलेजों को अच्छी कमाई होती है।
इसके अलावा टेक कंपनियों और दूसरे उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है, जहां बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों को नौकरी दी जाती है।
सरकार क्यों लगाना चाहती है इतनी फीस?
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद वीजा कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकना है।
विभाग के मुताबिक, OPT का इस्तेमाल सस्ते विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संगठन NAFSA ने इसका विरोध किया है। संगठन की CEO फांटा अव का कहना है कि विदेशी छात्रों को अमेरिका से दूर करने से रोजगार, आर्थिक विकास और नई तकनीक के क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।
क्या लागू हो गया नया नियम?
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है। इस पर लोगों को अपनी राय और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा।
इसके बाद DHS अंतिम फैसला ले सकता है। हालांकि, कॉलेज और कारोबारी संगठन इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं, जिससे लागू होने में देरी हो सकती है।
पहले भी सख्त कदम उठा चुका है प्रशासन
ट्रंप प्रशासन पहले भी विदेशी छात्रों को लेकर कई कदम उठा चुका है। पिछले साल हजारों छात्रों का कानूनी दर्जा खत्म किया गया था।
वहीं, इस साल चार साल से ज्यादा अमेरिका में रहने के लिए सरकारी मंजूरी से जुड़ा नियम भी लाया गया था, लेकिन सितंबर में संघीय अदालत ने उस पर रोक लगा दी थी।