छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शन से रोकने वाला आदेश वापस, CJP के विरोध के बाद विजय सरकार का फैसला!

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों और युवाओं को लेफ्ट पार्टियों और CJP के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला विवादित आदेश वापस ले लिया है। आदेश के बाद CJP ने इसे असंवैधानिक बताया था, जबकि बीजेपी ने समर्थन किया था। जानिए क्यों बढ़ा था यह राजनीतिक विवाद।

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In Short

  • तमिलनाडु सरकार ने छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने वाला आदेश वापस लिया
  • CJP ने आदेश को बताया था असंवैधानिक और तर्कहीन
  • NEET और परीक्षा पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के बीच आया था यह निर्देश

By Gaurav Kumar:

तमिलनाडु की विजय सरकार ने छात्रों और युवाओं को लेफ्ट पार्टियों और कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाले विवादित आदेश को वापस ले लिया है। इस आदेश के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया था और CJP ने इसे असंवैधानिक बताया था। सरकार के इस फैसले के बाद अब पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है कि आखिर यह आदेश क्यों जारी किया गया था।

छात्रों की भागीदारी रोकने के लिए जारी हुआ था निर्देश

तमिलनाडु सरकार ने 14 अगस्त को स्कूल एजुकेशन और हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट को एक निर्देश जारी किया था। इसमें अधिकारियों से कहा गया था कि लेफ्ट पार्टियों और CJP की ओर से आयोजित प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं की भागीदारी रोकने के लिए मिलकर कार्रवाई की जाए।

इस निर्देश के तहत स्कूल और कॉलेज छात्रों के साथ युवाओं पर भी नजर रखने और अलग-अलग विभागों के बीच कोऑर्डिनेशन बनाने को कहा गया था। हालांकि बाद में इस आदेश को वापस ले लिया गया।

कॉलेजों को भी दिए गए थे निर्देश

17 अगस्त को कॉलेजिएट एजुकेशन कमिश्नर की ओर से सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों के प्रिंसिपल को पत्र भेजा गया था। इसमें स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट, पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कदम उठाने को कहा गया था।

पत्र में कहा गया था कि छात्र और युवा इन राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल न हों। साथ ही कॉलेजों से तुरंत कार्रवाई की जानकारी डायरेक्टोरेट ऑफ कॉलेजिएट एजुकेशन को देने के लिए कहा गया था।

CJP ने बताया असंवैधानिक, बीजेपी ने किया समर्थन

इस आदेश के सामने आने के बाद CJP ने सरकार पर निशाना साधा और इसे असंवैधानिक, गलत और तर्कहीन बताया। पार्टी ने कहा कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

वहीं बीजेपी नेताओं ने इस फैसले का समर्थन किया। बीजेपी नेता विनोज पी सेल्वम ने लेफ्ट संगठनों और CJP पर छात्रों को भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम छात्रों को प्रदर्शन से दूर रखकर अपने करियर पर ध्यान देने में मदद करेंगे।

बीजेपी नेता राधिका खेड़ा ने भी इस आदेश को लेकर प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह कॉलेजों, पुलिस और जिला प्रशासन को दिया गया निर्देश था ताकि छात्र और युवा इन रैलियों में शामिल न हों।

परीक्षा पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के बीच आया था आदेश

यह आदेश ऐसे समय में आया था जब छात्रों और युवाओं के बीच परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इससे पहले NEET और अन्य परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर भी छात्रों ने प्रदर्शन किया था।

दिल्ली में CJP ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जिसमें भूख हड़ताल और संसद की ओर मार्च शामिल था। 20 जुलाई को हजारों छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया था और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड पार करने की कोशिश पर स्थिति बिगड़ गई थी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। बाद में पुलिस ने कहा था कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की थी, जिसके बाद कार्रवाई की गई।

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