अब ‘हाउसवाइफ’ शब्द भूल जाइए, सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को दिया नया नाम - बताया महिलाओं के घरेलू काम की कीमत कितनी

अदालत का मानना है कि घर और परिवार की देखभाल करने वाली महिलाएं केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके योगदान को सीमित दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए।

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By Gaurav Kumar:

Supreme Court on Housewife: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के घरेलू कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि 'गृहिणी' (Homemaker) शब्द की जगह 'नेशन बिल्डर' (Nation Builder) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि घर और परिवार की देखभाल करने वाली महिलाएं केवल अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके योगदान को सीमित दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्यों कही गई यह बात?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि घर में रहने वाली महिलाएं बिना किसी वेतन के कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। इनमें खाना तैयार करना, बच्चों की परवरिश करना, बुजुर्गों की देखभाल करना, परिवार को मैनेज करना और घर की अन्य जरूरतों को पूरा करना शामिल है। ये सभी कार्य समाज की बुनियाद को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। अदालत ने माना कि यह काम केवल घरेलू जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे हो मुआवजे की गणना

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि गृहिणी द्वारा परिवार को दी जाने वाली घरेलू देखभाल और सेवाओं का भी आर्थिक मूल्य होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सड़क दुर्घटना में गृहिणी की मौत हो जाती है या वह काम करने में असमर्थ हो जाती है, तो परिवार को घरेलू देखभाल के नुकसान के लिए अलग से मुआवजा मिलना चाहिए।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि गृहिणी का योगदान सिर्फ घर तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह बच्चों और परिवार के विकास के जरिए देश निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसलिए मोटर दुर्घटना मुआवजा तय करते समय गृहिणी की घरेलू सेवाओं के नुकसान को एक अलग आइटम के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घरेलू सेवाओं का मूल्यांकन कम से कम 30,000 रुपये प्रति माह के आधार पर किया जाना चाहिए। जस्टिस करोल ने कहा "गृहिणी राष्ट्र निर्माण में योगदान देती है, इसलिए उसके घरेलू कार्यों के नुकसान का उचित मूल्य तय किया जाना जरूरी है।"

महिलाओं के सम्मान की दिशा में बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी महिलाओं के घरेलू कार्यों को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि घर संभालने वाली महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभातीं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ऐसे में उन्हें 'गृहिणी' की बजाय 'नेशन बिल्डर' कहना उनके योगदान और सम्मान को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

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