Supernova Project पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 8 करोड़ रुपये खर्च हुए फिर भी निर्माण क्यों नहीं बढ़ा?

सुपरनोवा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होमबायर्स की ओर से गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दावा है कि एम्पावर्ड कमेटी और कंसल्टेंट्स पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन 8 महीने बाद भी निर्माण आगे नहीं बढ़ा। जानें आखिर क्या है पूरा मामला।

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In Short

  • सुपरनोवा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होमबायर्स की याचिका पर गंभीर सवाल उठे।
  • आरोप है कि कमेटी और कंसल्टेंट्स पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च हुए लेकिन निर्माण में एक ईंट भी नहीं लगी।
  • होमबायर्स ने सवाल उठाया कि प्रोजेक्ट का काम कब शुरू होगा और उन्हें उनके घर आखिर कब मिलेंगे।

By Gaurav Kumar:

Supernova Project Case: दिल्ली एनसीआर के सुपरनोवा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठे हैं। होमबायर्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह मुद्दा रखा गया कि प्रोजेक्ट पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा है लेकिन निर्माण के मोर्चे पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

होमबायर्स की ओर से पेश वकील यू के उनियाल ने कोर्ट को बताया कि पिछले 8 महीनों में एम्पावर्ड कमेटी की नियुक्ति के बावजूद प्रोजेक्ट में काम आगे नहीं बढ़ा है। उनका आरोप है कि कमेटी और कंसल्टेंट्स पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए एक भी ईंट नहीं लगी।

8 महीने में भी निर्माण शुरू नहीं होने का आरोप

होमबायर्स की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि एम्पावर्ड कमेटी को बने करीब 8 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद सुपरनोवा प्रोजेक्ट की अधूरी इमारतों पर कोई ठोस निर्माण गतिविधि शुरू नहीं हुई।

याचिकाकर्ताओं की चिंता यह है कि लंबे समय से घरों का इंतजार कर रहे खरीदारों को अब भी यह साफ नहीं है कि उनका प्रोजेक्ट कब पूरा होगा और उन्हें घर कब मिल पाएंगे।

कमेटी और कंसल्टेंट्स पर 8 करोड़ खर्च का दावा

कोर्ट के सामने यह भी आरोप लगाया गया कि एम्पावर्ड कमेटी के सदस्यों की सैलरी और कंसल्टेंट्स की फीस पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

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होमबायर्स की ओर से सवाल उठाया गया कि अगर निर्माण का काम ही शुरू नहीं हुआ तो इतनी बड़ी रकम किस काम पर खर्च हुई। यही मुद्दा सुनवाई के दौरान सबसे अहम सवालों में शामिल रहा।

अधूरे आशियानों की स्थिति जस की तस

होमबायर्स का कहना है कि खर्च के दावों के बावजूद जमीन पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिखा है। अधूरा निर्माण पहले की तरह ही पड़ा है और खरीदारों को अपने घर मिलने का इंतजार जारी है।

उनकी शिकायत है कि एक तरफ कमेटी और कंसल्टेंट्स पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बात कही जा रही है जबकि दूसरी तरफ प्रोजेक्ट पूरा करने की दिशा में कोई ठोस काम नजर नहीं आ रहा।

घर खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल

सुपरनोवा प्रोजेक्ट के होमबायर्स के लिए सबसे बड़ी चिंता अब भी उनके घरों की डिलीवरी है। कोर्ट में उठे सवालों के बीच खरीदार यह जानना चाहते हैं कि निर्माण आखिर कब शुरू होगा और अधूरे घर कब पूरे किए जाएंगे।

इसके साथ ही 8 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर भी सवाल बना हुआ है कि जब निर्माण आगे नहीं बढ़ा तो यह रकम किन कामों में इस्तेमाल की गई।

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