El Niño का भारत पर सबसे अधिक असर! ठंड के महीनों में भी तापमान रह सकता है अधिक, WMO की चेतावनी
भारत में इस बार सर्दियों के दौरान भी सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो के और मजबूत होने का अनुमान जताया है। दिसंबर में इसका असर चरम पर पहुंच सकता है। इससे खेती, बारिश और बिजली की मांग पर क्या असर पड़ेगा?

In Short
- दिसंबर में अल नीनो सबसे मजबूत हो सकता है।
- भारत में सर्दियों के दौरान गर्मी बढ़ सकती है।
- खेती, बारिश और बिजली की मांग पर असर संभव है।
भारत में आने वाले महीनों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो (El Niño) के और मजबूत होने का अनुमान जताया है। इसके चलते नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच देश में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने की संभावना है। इसका असर खेती, पानी की जरूरत और बिजली की मांग पर भी पड़ सकता है।
दिसंबर में सबसे ज्यादा मजबूत हो सकता है अल नीनो
WMO ने 20 अक्टूबर को तैयार अपनी ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट में बताया है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान और बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर से जनवरी के दौरान नीनो 3.4 इंडेक्स सामान्य स्तर से करीब 3.8 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच सकता है। दिसंबर में अल नीनो के सबसे मजबूत होने की संभावना है। कई जलवायु मॉडल भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
भारत में सर्दियों के दौरान बढ़ सकती है गर्मी
WMO के अनुमान के मुताबिक, भारतीय उपमहाद्वीप में आने वाले महीनों के दौरान तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना काफी बढ़ गई है।
इसका असर सर्दियों के मौसम, बिजली की खपत और लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि भारत के किन राज्यों में तापमान सबसे ज्यादा बढ़ेगा या कितनी गर्मी पड़ेगी।
क्या भारत में कम होगी बारिश?
अल नीनो का असर भारत में मानसून और बारिश के पैटर्न पर भी पड़ता है। हालांकि, WMO ने नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के दौरान देश में बारिश कम होने या सूखा पड़ने का कोई निश्चित अनुमान नहीं दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो का असर अलग-अलग इलाकों और मौसम में अलग हो सकता है। इसलिए इसके मजबूत होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में सूखा जरूर पड़ेगा।
वहीं, जुलाई से सितंबर के दौरान मजबूत हुआ पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल भी आने वाले महीनों में कमजोर पड़ सकता है।
किसानों और पानी की जरूरत पर क्या होगा असर?
सामान्य से ज्यादा तापमान रहने पर खेतों में नमी, सिंचाई की जरूरत और फसलों की बढ़ोतरी प्रभावित हो सकती है। खासकर सर्दियों की फसलों के लिए किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा कुछ इलाकों में बिजली की मांग बढ़ सकती है। पानी के भंडारण और जल प्रबंधन से जुड़े फैसलों में भी मौसम के बदलते रुझानों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
IMD के अपडेट पर रहेगी नजर
WMO ने साफ किया है कि उसकी रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर मौसम के रुझान बताती है, न कि किसी देश का सटीक पूर्वानुमान।
भारत में अलग-अलग राज्यों के मौसम की सही जानकारी के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अपडेट महत्वपूर्ण होंगे। आने वाले महीनों में तापमान और बारिश की स्थिति से ही साफ होगा कि मजबूत अल नीनो का देश की खेती, पानी और आम जिंदगी पर कितना असर पड़ेगा।