'मेक इन इंडिया' की बड़ी उड़ान! Skyroot के रॉकेट Vikram-1 के 90% से ज्यादा पार्ट्स भारत में बने, पूरी डिटेल
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले 90% से ज्यादा मुख्य पार्ट्स, सिस्टम और तकनीक भारत में ही डिजाइन, डेवलप और तैयार की गई है। सिर्फ कुछ एडवांस स्पेस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ (COTS) पार्ट्स के लिए ग्लोबल सप्लायर्स की मदद ली गई है।

By Franklin Nigam, Gaurav Kumar:
भारतीय प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप Skyroot Aerospace का Vikram-1 रॉकेट 'मेक इन इंडिया' की बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। बीते शनिवार 18 जुलाई को Skyroot Aerospace ने भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च किया। यह मिशन पहले ही प्रयास में पूरी तरह सफल रहा।
Vikram-1 की असेंबली, क्वालिटी टेस्टिंग और लॉन्चिंग की पूरी प्रक्रिया भारत में ही हुई। इसके लिए Skyroot Aerospace ने ISRO के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया है।
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले 90% से ज्यादा मुख्य पार्ट्स, सिस्टम और तकनीक भारत में ही डिजाइन, डेवलप और तैयार की गई है। सिर्फ कुछ एडवांस स्पेस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और कमर्शियल ऑफ-द-शेल्फ (COTS) पार्ट्स के लिए ग्लोबल सप्लायर्स की मदद ली गई है।
भारत में तैयार हुए इंजन और प्रोपल्शन सिस्टम
Vikram-1 के पहले तीन स्टेज में इस्तेमाल होने वाले Kalam-1200, Kalam-250 और Kalam-100 सॉलिड मोटर्स को Skyroot Aerospace ने भारत में डिजाइन किया है। इनका निर्माण नागपुर की Solar Industries India के साथ साझेदारी में किया गया है।
रॉकेट के अपर स्टेज में लगा Raman-II लिक्विड इंजन भी पूरी तरह भारत में डिजाइन और 3D प्रिंट किया गया है। इन इंजनों की टेस्टिंग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के महेंद्रगिरी स्थित IPRC और थुम्बा स्थित VSSC केंद्रों में की गई।
हल्का और मजबूत बॉडी
Vikram-1 की बॉडी और मोटर केसिंग एडवांस कार्बन फाइबर कंपोजिट मटेरियल से तैयार की गई है। इसके निर्माण के लिए Skyroot ने भारतीय कंपोजिट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ काम किया है। इस हल्के लेकिन मजबूत स्ट्रक्चर का उद्देश्य रॉकेट की क्षमता और दक्षता बढ़ाना है।
गाइडेंस सिस्टम भारतीय, कुछ चिप्स विदेश से
रॉकेट का फ्लाइट कंप्यूटर, नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम Skyroot की भारतीय इंजीनियरिंग टीम ने विकसित किया है। हालांकि, कुछ माइक्रोचिप्स, सेंसर और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे देशों के सप्लायर्स से लिए जाते हैं। स्पेस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए यह पूरी वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।

