द कश्मीर फाइल्स' रिलीज हो सकती है तो 'सतलुज' क्यों नहीं? फिल्म हटाने पर भड़के फिल्म के को-राइटर निरेन भट्ट
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ अचानक Zee5 पर रिलीज हुई और दो दिन बाद ही भारत में हटा दी गई। अब फिल्म के राइटर निरेन भट्ट ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर परेशानी है, तो साफ बताया जाना चाहिए कि दिक्कत किस हिस्से से है।

In Short
- ‘सतलुज’ शुक्रवार रात अचानक Zee5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रविवार शाम इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।
- फिल्म के राइटर निरेन भट्ट ने पूछा कि अगर फिल्म से दिक्कत है, तो यह साफ क्यों नहीं बताया जा रहा कि परेशानी किस हिस्से से है।
- निरेन भट्ट ने कहा कि ऐसी कहानियों को रोकने से लोगों की दिलचस्पी और बढ़ती है, और इससे फिल्ममेकर्स का हौसला भी टूट सकता है।
Satluj controversy: दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज एक बार फिर चर्चा में है। शुक्रवार रात यह फिल्म Zee5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रविवार शाम इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। प्लेटफॉर्म की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया कि “मौजूदा परिस्थितियों” की वजह से फिल्म भारत में नहीं दिखेगी।
यह फिल्म पहले पंजाब 95 नाम से बनी थी और करीब तीन साल से CBFC के पास अटकी हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने की मांग की थी। ऐसे में जब फिल्म अचानक रिलीज हुई, तो दर्शकों को लगा कि लंबे इंतजार के बाद अब वे यह फिल्म देख पाएंगे। लेकिन दो दिन बाद ही फिल्म हटने से नया विवाद शुरू हो गया।
फिल्म हटाने पर को-राइटर ने उठाए सवाल
फिल्म के को-राइटर निरेन भट्ट ने Zee5 के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने वैरायटी इंडिया से बातचीत में कहा कि जब कोई प्लेटफॉर्म सिर्फ “मौजूदा परिस्थितियों” की बात करता है, लेकिन यह नहीं बताता कि परेशानी क्या है, तो बातचीत कैसे होगी?
निरेन का कहना है कि CBFC भी कभी साफ नहीं बताता कि उसे फिल्म के किस हिस्से से दिक्कत है। उनके मुताबिक, अगर कोई परेशानी है तो उस पर खुलकर बात होनी चाहिए। लेकिन अगर सामने वाला चुपचाप काम हटा दे, तो बातचीत की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है।
अचानक रिलीज ने सबको चौंका दिया
निरेन भट्ट ने बताया कि वह फिल्म के रिलीज होने की उम्मीद छोड़ चुके थे। शुक्रवार शाम उन्हें एक मैसेज से पता चला कि फिल्म Zee5 पर रिलीज हो गई है।
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उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से फिल्म में कुछ भी गलत नहीं है। यह एक बैंक कर्मचारी की कहानी है, जिसने उन परिवारों के लिए आवाज उठाई, जिनके अपने लोगों को गैरकानूनी तरीके से उठा लिया गया और मार दिया गया।
दर्शकों का जबरदस्त रिएक्शन, सोशल मीडिया पर छाई फिल्म
निरेन के मुताबिक, फिल्म हटाए जाने से पहले दर्शकों का रिएक्शन काफी मजबूत था। लोग यह पूछ रहे थे कि इतनी अच्छी कहानी को इतने साल तक क्यों रोका गया।
उन्होंने कहा कि कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि फिल्म देखकर वे भावुक हो गए। कुछ लोगों ने कहा कि फिल्म देखने के बाद वे लंबे समय तक कुछ बोल नहीं पाए।
‘सतलुज’ पर ही सवाल क्यों?
निरेन भट्ट ने यह भी पूछा कि अगर द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी जैसी फिल्में बन सकती हैं, तो सतलुज को मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए था?
उनका कहना है कि यह कहना ठीक नहीं है कि इस फिल्म का इस्तेमाल देश के खिलाफ लोग कर सकते हैं। निरेन भट्ट के मुताबिक, एक सीधी-सच्ची कहानी को रोकने के लिए ऐसे अनुमान लगाना सही नहीं है।
रोक से बढ़ती है लोगों की दिलचस्पी
निरेन ने कहा कि किसी भी कंटेंट को रोकने से लोगों की दिलचस्पी और बढ़ जाती है। उनके मुताबिक, जब दर्शक फिल्म को ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर नहीं देख पाएंगे, तो वे दूसरे रास्ते तलाशेंगे।
उन्होंने अंत में कहा कि दुनिया को ऐसी कहानियों की जरूरत है। लेकिन अगर ऐसी फिल्मों के साथ यही होता रहा, तो आगे कोई फिल्ममेकर इस तरह की फिल्म बनाने की हिम्मत कैसे करेगा?