BT India @ 100: भारत के 90% से ज्यादा आयात निर्यात विदेशी जहाजों पर, संजीव सान्याल ने जताई चिंता

भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा विदेशी जहाजों पर निर्भर है। संजीव सान्याल ने इसे देश की बड़ी रणनीतिक कमजोरी बताया है। उनका कहना है कि भारत के पास शिपबिल्डिंग हब बनने के लिए मांग, स्टील, इंजीनियरिंग क्षमता और युवा वर्कफोर्स जैसी जरूरी ताकतें मौजूद हैं।

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By Gaurav Kumar:

भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा विदेशी जहाजों के जरिए होता है और यही देश की एक बड़ी रणनीतिक कमजोरी है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने कहा कि भारत के 90 फीसदी से ज्यादा आयात और निर्यात विदेशी जहाजों पर निर्भर हैं।

Business Today India @ 100 कार्यक्रम में बिजनेस टुडे के एडिटर इन चीफ सिद्धार्थ जराबी से बातचीत में सान्याल ने कहा कि इस स्थिति की वजह से भारत ग्लोबल शिपिंग में किसी भी रुकावट या भू-राजनीतिक तनाव से सीधे प्रभावित हो सकता है।

व्यापार के लिहाज से भारत एक द्वीप जैसा

सान्याल ने कहा कि भारत की कई देशों से जमीन की सीमा जुड़ी हुई है, लेकिन व्यापार के नजरिए से देश लगभग एक द्वीप की तरह है। चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का बड़ा व्यापार समुद्री रास्तों से होता है।

उन्होंने कहा कि अगर कुछ बड़ी शिपिंग कंपनियां भारत के साथ काम करने से पीछे हट जाएं तो देश को गंभीर परेशानी हो सकती है।

जहाज बनाने में चीन का दबदबा

सान्याल के मुताबिक, दुनिया में बनने वाले करीब 55 से 60 फीसदी जहाज चीन में तैयार होते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया की हिस्सेदारी लगभग 15 से 20 फीसदी के बीच रहती है।

वहीं भारत की हिस्सेदारी हाल तक 1 फीसदी से भी कम थी। सान्याल का मानना है कि यही कमजोरी भारत के लिए बड़ा मौका भी बन सकती है।

फाइनेंसिंग रही सबसे बड़ी चुनौती

सान्याल ने कहा कि शिपिंग लंबे समय की फाइनेंसिंग वाला कारोबार है क्योंकि एक जहाज आमतौर पर 30 से 40 साल तक चलता है।

पहले भारतीय शिपबिल्डिंग सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा नहीं मिला था, इसलिए बैंकों से लंबी अवधि की फंडिंग मिलना मुश्किल था। उन्होंने कहा कि पिछले 24 महीनों में जहाजों की ओनरशिप, फ्लैगिंग और फाइनेंसिंग से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं।

उनके मुताबिक, इसका असर अब दिखने लगा है और कुछ भारतीय शिपयार्ड के पास पांच से छह साल तक के ऑर्डर बुक हो चुके हैं।

भारत के पास शिपबिल्डिंग के लिए जरूरी ताकत

सान्याल ने कहा कि भारत के पास मांग, स्टील, इंजीनियरिंग क्षमता, युवा वर्कफोर्स और लंबी समुद्री तटरेखा जैसी कई खूबियां हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है और परमाणु पनडुब्बी व एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे जटिल प्लेटफॉर्म भी बना चुका है।

उन्होंने कहा कि हुंडई और मित्सुबिशी जैसी विदेशी कंपनियां भी भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर में रुचि दिखा रही हैं।

पांच छह साल में टॉप खिलाड़ियों में पहुंचने का दावा

सान्याल ने कहा कि अगले पांच से छह साल में भारत दुनिया के गंभीर चौथे बड़े शिपबिल्डिंग खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है। उनका कहना है कि असली लक्ष्य सिर्फ देश में जहाज बनाना नहीं बल्कि विदेशी शिपिंग लाइनों पर निर्भरता कम करना भी है।
 

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